हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 में पहली बार होगा अमृत स्नान, संतों में बनी सर्वसम्मति
हरिद्वार: अर्ध कुंभ मेले की परंपराओं में एक बड़ा बदलाव करते हुए उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 में भी अमृत स्नान की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब तक अमृत स्नान की परंपरा केवल प्रयागराज अर्ध कुंभ तक सीमित थी, लेकिन पहली बार हरिद्वार के अर्ध कुंभ में भी सभी अखाड़ों को अमृत स्नान का अवसर मिलेगा। यह महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में दामकोठी में हुई बैठक में लिया गया।

बीते कई सप्ताहों से अर्ध कुंभ के आयोजन को लेकर संत समाज और अखाड़ों के बीच मतभेद बना हुआ था। अमृत स्नान सहित कई व्यवस्थाओं पर अलग-अलग राय सामने आ रही थी।शुक्रवार को दाम कोठी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि एकत्र हुए। लगभग दो घंटे चली इस बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई और अंततः सर्वसम्मति से मतभेद समाप्त कर लिए गए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने 24 नवंबर 2027 से शुरू होने वाले हरिद्वार अर्ध कुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियों की भी औपचारिक घोषणा की। उन्होंने संतों को आश्वस्त किया कि उनकी परंपराओं, सुविधाओं और धार्मिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजन की तैयारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
अब तक प्रयागराज में ही अमृत स्नान की व्यवस्था होती थी, जबकि हरिद्वार में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। अखाड़ों की वर्षों पुरानी मांग को मानते हुए सरकार ने इस परंपरा को हरिद्वार में भी लागू करने का निर्णय लिया है। इससे अर्ध कुंभ का महत्व और बढ़ जाएगा तथा हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और संतों दोनों को विशेष धार्मिक अनुभव प्राप्त होगा।

बैठक में सुरक्षा, व्यवस्थाओं, मार्ग योजना, साधु-संतों के आवासन, वाहनों के प्रवाह, स्वास्थ्य सुविधाओं, घाटों की सफाई और संगठित प्रबंधन को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि“संतों के सुझावों के आधार पर अर्ध कुंभ की हर तैयारी समय से और उच्च मानकों के अनुसार पूरी की जाएगी। सरकार और संत समाज मिलकर इस महाआयोजन को सफल बनाएंगे।”
अमृत स्नान की घोषणा के साथ ही हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 में परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं का एक नया अध्याय शुरु होगा। संतों, श्रद्धालुओं और व्यापारिक समुदाय को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
