दही: रोजाना एक कटोरी खाने से कम होगा कोलोन कैंसर का खतरा? जानिए सच्चाई


भारत में दही का सेवन आम है। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और प्रोबायोटिक्स जैसे तत्व होते हैं, जो रोगों से रक्षा करते हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार, दही कोलन कैंसर का खतरा भी कम कर सकता है।
कैंसर एक गंभीर वैश्विक बीमारी है, जो भारत में तेजी से फैल रही है, खासकर युवाओं में कोलन या बॉवेल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। यह बीमारी गलत खान-पान, फाइबर की कमी, मोटापा और सुस्त जीवनशैली के कारण होती है। हालांकि, दही का नियमित सेवन आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर कोलन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स और लैक्टिक एसिड आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और हानिकारक तत्वों से लड़ते हैं। सादी दही, सलाद में मिलाकर, रायता बनाकर, हल्दी या अलसी के बीज के साथ, या आंवला मिलाकर खाने से इसके लाभ बढ़ जाते हैं।
आंतों को स्वस्थ रखता है दही
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (गुड बैक्टीरिया) आंतों की सेहत के लिए बेहद जरूरी होते हैं। यह अच्छे बैक्टीरिया आंतों में संतुलन बनाए रखते हैं। इसके अलावा यह आंतों में सूजन को कम करता है, जो कैंसर का मुख्य कारण हो सकता है।
डाइजेशन को बनाए मजबूत
दही खाने से पाचन सही रहता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। पाचन सही रहने से टॉक्सिन्स जल्दी बाहर निकल जाते हैं, जिससे कैंसर सेल्स बनने की संभावना कम हो जाती है।
इम्युनिटी होती स्ट्रॉन्ग
कोलन कैंसर के खतरे को कम करने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत जरूरी है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स, विटामिन डी और कैल्शियम इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। इससे शरीर कैंसर सेल्स को खत्म करने में सक्षम होता है।
कैंसर को बढ़ने से रोकता है दही
दही में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है। ये आंतों की अंदरूनी परत की रक्षा करता है। इसके अलावा कैंसर सेल्स की ग्रोथ को रोकने में मदद करता है।
कोलन कैंसर के लक्षण
- मल में खून आना
- वजन कम होना
- थकान महसूस होना
- पेट में दर्द, क्रैम्प, ब्लोटिंग
- एनीमिया, त्वचा का पीला होना
- पेशाब के रंग में बदलाव नजर आना
- सांस लेने में तकलीफ होना
- पेशाब में खून आना
- बार-बार पेशाब लगना
