गंगोत्री नेशनल पार्क आज शीतकाल के लिए बंद, धराली आपदा से घटे पर्यटक

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उत्तरकाशी: गंगोत्री नेशनल पार्क के द्वार आज से शीतकाल के लिए आधिकारिक रूप से बंद हो जाएंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी नवंबर के अंत तक पार्क को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि गहरे हिम क्षेत्रों में वन्यजीवों को सुरक्षित और शांत वातावरण मिल सके। हालांकि इस वर्ष पर्यटन गतिविधियों पर प्रकृति की मार साफ दिखाई दी।

गंगोत्री धाम क्षेत्र में इस साल हुई धराली आपदा ने पर्यटकों की आवाजाही पर व्यापक असर डाला। सड़क मार्गों के बाधित रहने और मौसम के प्रतिकूल रहने के कारण पर्यटक संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। पार्क प्रशासन के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पार्क आने वाले पर्यटकों की संख्या कम रही है।

हालांकि इन चुनौतियों के बीच भी गर्तांग गली ट्रेक ने पर्यटकों को अपनी ओर सबसे अधिक आकर्षित किया। लकड़ी की सीढ़ियों और खड़ी चट्टानों पर बने इस ऐतिहासिक मार्ग के रोमांच ने इस साल भी साहसिक ट्रैकिंग प्रेमियों को खूब लुभाया। गर्तांग गली में अन्य स्थानों की तुलना में पर्यटक संख्या अधिक रही, जिससे स्थानीय व्यापारियों को आंशिक राहत मिली।

वर्ष 1989 में स्थापित गंगोत्री नेशनल पार्क देश के प्रमुख उच्च हिमालयी जैवविविधता क्षेत्रों में से एक है और इसे हिम तेंदुओं का सुरक्षित आवास माना जाता है। पार्क में हिमालयी नीली भेड़, कस्तूरी मृग, हिमालयी भालू समेत अनेक दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण के लिए पार्क प्रशासन इस वर्ष विशेष रूप से सक्रिय रहा।

पार्क में 70 आधुनिक कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वन्यजीव गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शीतकाल के दौरान इन कैमरों से मिलने वाले डेटा का उपयोग आने वाले महीनों में संरक्षण रणनीति तैयार करने में किया जाएगा।

दिसंबर से मार्च तक पार्क के बंद रहने के दौरान यहां भारी बर्फबारी के कारण मानवीय गतिविधियां लगभग शून्य रहती हैं। पार्क प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों से क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।

शीतकालीन बंदी के बाद गंगोत्री नेशनल पार्क अगले वर्ष अप्रैल में पुनः खोला जाएगा, जब बर्फ पिघलने के साथ उच्च हिमालयी क्षेत्र फिर से पर्यटकों के लिए सुरक्षित हो जाएगा।

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