ऋषिकेश में चरमराई महिला स्वास्थ्य सेवा, 150 से अधिक मरीजों की जिम्मेदारी एक डॉक्टर पर

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तीन महिला चिकित्सकों के पद खाली, रोजाना 150 से 170 मरीज पहुंच रहे अस्पताल; घंटों इंतजार के बाद भी बिना जांच लौटने की नौबत

ऋषिकेश। राजकीय उप जिला चिकित्सालय में महिला मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं चिकित्सकों की कमी से प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में महिला चिकित्सकों के चार पद स्वीकृत होने के बावजूद फिलहाल केवल एक महिला चिकित्सक के जिम्मे पूरी ओपीडी का संचालन है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं सहित अन्य महिला मरीजों को उपचार और जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के दो और महिला चिकित्साधिकारी के दो पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद तीन पद रिक्त होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि प्रतिदिन करीब 150 से 170 गर्भवती महिलाएं और अन्य महिला मरीज परामर्श के लिए अस्पताल पहुंचती हैं। मरीजों की इतनी बड़ी संख्या के मुकाबले एक चिकित्सक होने से ओपीडी का संचालन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

कई जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों का दबाव

राजकीय उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश के अलावा टिहरी और पौड़ी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों तथा रायवाला, श्यामपुर, खदरी, गुमानीवाला समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए भी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां दूरदराज से गर्भवती महिलाएं नियमित जांच और परामर्श के लिए पहुंचती हैं।

चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। भीड़ अधिक होने पर कई मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल पाती और उन्हें बिना उपचार कराए ही वापस लौटने की नौबत आती है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रही है।

अल्ट्रासाउंड और प्रसव सेवाओं पर भी असर

एक ही महिला चिकित्सक पर अधिक कार्यभार होने से मरीजों को पर्याप्त समय दे पाना मुश्किल हो रहा है। इसका असर नियमित जांच के साथ अल्ट्रासाउंड, प्रसव संबंधी सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अस्पताल में आने वाली महिलाओं को बेहतर और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग

मरीजों और उनके तीमारदारों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में रिक्त पड़े तीन महिला चिकित्सकों के पदों पर जल्द नियुक्ति करने की मांग की है। उनका कहना है कि महिला मरीजों की संख्या और अस्पताल पर आसपास के क्षेत्रों की निर्भरता को देखते हुए पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती जरूरी है। नियुक्तियां होने से ओपीडी में भीड़ कम करने, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और अन्य स्त्री रोग संबंधी सेवाओं को सुचारु बनाने में मदद मिल सकती है।

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