उत्तराखंड में भूकंप निगरानी होगी मजबूत, आठ नई वेधशालाओं से धरती की हलचल पर रहेगी नजर
देहरादून। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील उत्तराखंड में अब धरती के भीतर होने वाली हलचल पर नजर रखने का तंत्र और मजबूत होने जा रहा है। केंद्र सरकार देशभर में भूकंप निगरानी नेटवर्क को विस्तार देते हुए 100 नई भूकंप विज्ञान वेधशालाएं स्थापित करने की तैयारी कर रही है। इनमें आठ वेधशालाएं उत्तराखंड में स्थापित की जाएंगी। इससे प्रदेश में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी बेहतर होने और कम तीव्रता वाले भूकंपों का भी पता लगाने में मदद मिलेगी।
हिमालयी क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड में भूगर्भीय गतिविधियां लगातार सक्रिय रहती हैं। ऐसे में यहां भूकंप की घटनाओं पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 14 अक्टूबर से अब तक प्रदेश में 55 बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं। इनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.2 से 4.9 के बीच रही। यह स्थिति राज्य में प्रभावी भूकंप निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां भी इस चुनौती को गंभीर बनाती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऊंची ढलानें, दुर्गम रास्ते, भूस्खलन का खतरा और सीमित सड़क संपर्क होने के कारण किसी बड़े भूकंप के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में भूकंप की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिलने से संबंधित विभागों को परिस्थितियों का आकलन करने और जरूरी तैयारियां करने में सहायता मिल सकती है।
आठ जिलों में स्थापित होंगी नई वेधशालाएं
उत्तराखंड में प्रस्तावित वेधशालाओं के लिए आठ स्थानों का चयन किया गया है। इनमें रुड़की (हरिद्वार), रामनगर (नैनीताल), देवप्रयाग (टिहरी), कर्णप्रयाग (चमोली), केदारनाथ (रुद्रप्रयाग), चकराता (देहरादून), बागेश्वर और अल्मोड़ा शामिल हैं। इन स्थानों पर वेधशालाएं स्थापित होने से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
राज्य की ओर से चयनित स्थलों का प्रस्ताव राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेज दिया गया है। योजना का उद्देश्य भूकंप निगरानी नेटवर्क का विस्तार कर धरती के भीतर होने वाली गतिविधियों से संबंधित आंकड़ों को अधिक प्रभावी ढंग से जुटाना है।
आपदा प्रबंधन को मिलेगी मजबूती
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, प्रस्तावित वेधशालाओं के माध्यम से कम तीव्रता वाले भूकंपों का पता लगाने की क्षमता बढ़ाने और उनसे जुड़ी सूचनाओं का तेजी से प्रसार करने पर जोर दिया जाएगा। इससे आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों और अन्य संबंधित संस्थानों को भूकंपीय गतिविधियों का आकलन करने में मदद मिलेगी।
नई वेधशालाएं स्थापित होने के बाद उत्तराखंड में भूकंप संबंधी आंकड़ों की उपलब्धता और निगरानी क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा। हालांकि, भूकंप की सटीक भविष्यवाणी फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन मजबूत निगरानी तंत्र से जोखिम का आकलन करने, आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाने और संभावित नुकसान कम करने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।


