इलाज के लिए एम्स पहुंचना अब महंगा! पार्किंग शुल्क को लेकर ऋषिकेश में नाराजगी

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ऋषिकेश। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में पार्किंग शुल्क की नई व्यवस्था अब चर्चा का विषय बन गई है। संस्थान में आने वाले मरीजों के तीमारदारों और स्थानीय लोगों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए इसे आमजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। लोगों का कहना है कि इलाज के लिए पहले से ही कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में वाहन खड़ा करने के लिए शुल्क वसूला जाना उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है।

स्थानीय लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि नई व्यवस्था में उन्हें भी कोई विशेष रियायत नहीं दी जा रही है। लोगों का मानना है कि क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा संस्थान होने के नाते एम्स प्रशासन को मरीजों और उनके परिजनों की जरूरतों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही, अब पार्किंग भी जेब पर भारी

ऋषिकेश एम्स में प्रतिदिन करीब चार से पांच हजार लोगों की आवाजाही होती है। इनमें बड़ी संख्या उन मरीजों और उनके तीमारदारों की होती है, जो दोपहिया और चौपहिया वाहनों से उपचार के लिए संस्थान पहुंचते हैं। अब तक मुख्य गेट के समीप वाहन पार्क करने की सुविधा निश्शुल्क थी, लेकिन हाल ही में लागू की गई नई व्यवस्था के तहत दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है।

इस बदलाव के बाद अस्पताल आने वाले लोगों को अब पार्किंग के लिए भी भुगतान करना पड़ रहा है। खासकर उन मरीजों के परिजनों के लिए यह व्यवस्था परेशानी का कारण बन सकती है, जिन्हें जांच, परामर्श या उपचार के सिलसिले में बार-बार अस्पताल आना पड़ता है।

स्थानीय लोगों को रियायत नहीं मिलने पर भी नाराजगी

पार्किंग शुल्क को लेकर स्थानीय नागरिकों की आपत्ति है कि ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों से एम्स आने वाले लोगों को भी सामान्य शुल्क देना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी जरूरी जगह पर ऐसी व्यवस्था बनाते समय मरीजों, उनके तीमारदारों और स्थानीय निवासियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पहले भी शुल्क संबंधी फैसलों पर उठ चुके हैं सवाल

एम्स में शुल्क को लेकर विरोध का यह मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न शुल्कों को लेकर असहमति सामने आने के बाद संस्थान प्रशासन को अपने कुछ फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ा था। ऐसे में पार्किंग शुल्क की नई व्यवस्था ने एक बार फिर प्रशासन की नीतियों और आमजन को मिलने वाली सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।

अब सवाल यह है कि क्या एम्स प्रशासन मरीजों और स्थानीय लोगों की परेशानियों को देखते हुए पार्किंग शुल्क व्यवस्था में कोई राहत देने पर विचार करेगा? फिलहाल, इस व्यवस्था को लेकर लोगों की नाराजगी के बीच प्रशासन के रुख पर नजर बनी हुई है।

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