एम्स ऋषिकेश में भर्ती फर्जीवाड़े का राजस्थान कनेक्शन फिर चर्चा में, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वायरमैन पद पर नियुक्ति के दौरान फर्जी पहचान का मामला सामने आने के बाद राजस्थान कनेक्शन की चर्चा तेज हो गई है। इस प्रकरण में राजस्थान निवासी दो व्यक्तियों के खिलाफ ऋषिकेश पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, वर्ष 2022 में सामने आए नर्सिंग संवर्ग की भर्ती विवाद की यादें भी ताजा हो गई हैं।

ताजा मामले ने एम्स की भर्ती प्रक्रिया में अभिलेखों के सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब उजागर हुआ, जब वायरमैन पद के लिए अभिलेख सत्यापन के दौरान परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी और नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति की पहचान में अंतर पाया गया। इसके बाद कथित भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई।

फर्जी पहचान के मामले में दो लोगों पर मुकदमा

एम्स ऋषिकेश के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह ने इस संबंध में एम्स पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के जयपुर निवासी अशोक कुमार मीणा और दौसा निवासी विकास कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

मामले के सामने आने के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में पहचान की पुष्टि और दस्तावेजों की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिस संस्थान में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त निगरानी की अपेक्षा की जाती है, वहां नियुक्ति के स्तर पर इस तरह की विसंगति सामने आना गंभीर माना जा रहा है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

नर्सिंग भर्ती विवाद में भी सामने आया था राजस्थान का नाम

एम्स ऋषिकेश में भर्ती से जुड़ा विवाद नया नहीं है। फरवरी 2022 में नर्सिंग संवर्ग की नियुक्तियों को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया था। उस समय भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर एम्स प्रबंधन से लेकर भारत सरकार तक शिकायतें पहुंची थीं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि भर्ती के दौरान नियमों का उचित पालन नहीं किया गया और एक विशेष राज्य के अभ्यर्थियों को बड़ी संख्या में नियुक्तियां दी गईं। उस समय करीब 800 पदों पर हुई भर्ती में 60 प्रतिशत से अधिक चयनित अभ्यर्थियों के राजस्थान निवासी होने की चर्चाएं सामने आई थीं। इसके अलावा, एक ही परिवार के चार से पांच सदस्यों को नियुक्ति मिलने के आरोप भी लगाए गए थे।

इन आरोपों के चलते नर्सिंग भर्ती का मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित नियुक्तियां निरस्त किए जाने की बात सामने आई थी। इस प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी की थी।

बार-बार उठते सवाल, जवाबदेही की दरकार

एम्स ऋषिकेश में भर्ती से जुड़े पुराने विवाद और हालिया मामला संस्थान की चयन प्रक्रिया की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। खासकर तब, जब नियुक्ति से पहले अभिलेख सत्यापन और पहचान की पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

अब देखना होगा कि ताजा प्रकरण की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कथित फर्जीवाड़े में किसकी भूमिका उजागर होती है। फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।

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