SC-ST शिक्षक एसोसिएशन की 19 मांगों पर शासन में मंथन, आरक्षण से लेकर टीईटी तक के मुद्दे उठे

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देहरादून। अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन की लंबित मांगों को लेकर शासन स्तर पर हलचल तेज हुई है। संगठन की 19 सूत्री मांगों पर सचिवालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने विस्तार से चर्चा की। बैठक में आरक्षण, पदोन्नति, रिक्त पदों पर भर्ती, पुरानी पेंशन और शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

सचिव कार्मिक एवं सतर्कता शैलेश बगोली की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने संगठन की मांगों के समर्थन में दस्तावेज, साक्ष्य और संबंधित शासनादेश प्रस्तुत किए। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों, विभागीय पत्रों और न्यायालयों के फैसलों का उल्लेख करते हुए मांगों के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

आरक्षण, बैकलॉग और पदोन्नति के मुद्दों पर चर्चा

बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इनमें आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण लागू करने, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने, शिक्षकों के स्थानांतरण, आरक्षण एवं पदोन्नति और पुरानी पेंशन से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इसके अलावा गोल्डन कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र तथा छात्रवृत्ति व्यवस्था में सुधार की मांग भी उठाई गई।

एसोसिएशन ने छात्रवृत्ति व्यवस्था से संबंधित आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और न्यायमूर्ति इरशाद हुसैन से जुड़ी रिपोर्ट के संदर्भ में रिक्त पदों के मुद्दे समेत विभिन्न विषयों पर शासन का ध्यान आकर्षित किया।

टीईटी की अनिवार्यता पर भी उठे सवाल

सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता का विषय बैठक में विशेष रूप से चर्चा में रहा। संगठन ने वर्ष 2011 से पहले नियुक्त प्रारंभिक शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग रखी। साथ ही माध्यमिक शिक्षा के एलटी संवर्ग में टीईटी-द्वितीय की अनिवार्यता की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए।

एसोसिएशन का पक्ष रहा कि शिक्षकों से जुड़े इन विषयों पर निर्णय लेते समय नियुक्ति संबंधी परिस्थितियों, लागू नियमों और न्यायालयों के निर्णयों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मांगों की अनदेखी का लगाया आरोप

प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने कहा कि संगठन लंबे समय से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें शासन के समक्ष रख रहा है। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता जताई।

बैठक में संगठन के महामंत्री सुरेश चंद्र, संजय कुमार, दीपक कुमार और कमल कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। अब संगठन की नजरें इन मांगों पर शासन की ओर से होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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