AI और नई शिक्षा नीति से बदलेगा बीसीए का पाठ्यक्रम, श्रीदेव सुमन विवि में सुधारों पर बनी सहमति
ऋषिकेश। तकनीकी शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने और विद्यार्थियों को रोजगारपरक ज्ञान से जोड़ने की दिशा में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ने बीसीए और कंप्यूटर साइंस के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी तेज कर दी है। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत पाठ्यक्रम को परिणाम आधारित बनाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देने और शिक्षण व मूल्यांकन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
इसी क्रम में वर्चुअल माध्यम से आयोजित बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में पाठ्यक्रम से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई। सदस्यों ने मौजूदा शैक्षणिक व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के सुझाव दिए, जिनमें से कई को मंजूरी देते हुए संस्तुतियों को आगे की प्रक्रिया के लिए अकादमिक परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. एसपी सती ने की। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों को समय की मांग के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। इसके लिए विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक कौशल, तकनीकी दक्षता और नवाचार से जोड़ना होगा।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अंबरीश कुमार महाजन ने सभी विषयों के पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत शिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली को प्रभावी बनाने के साथ विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
क्रेडिट आधारित व्यवस्था पर भी मंथन
बैठक में विद्यार्थियों को एक शैक्षणिक वर्ष से अगले वर्ष में पदोन्नत करने के लिए क्रेडिट आधारित व्यवस्था पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही बीसीए और कंप्यूटर साइंस के पाठ्यक्रमों में शैक्षणिक सुधार, भविष्य की जरूरतों और नए तकनीकी नवाचारों को शामिल करने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
बीसीए संयोजक डॉ. गौरव वाष्र्णेय ने पाठ्यक्रम की वर्तमान प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की। बैठक में प्रो. एमपी थपलियाल, प्रो. एमके शर्मा, प्रो. राकेश मोहन भट्ट, डॉ. नवीन महाजन सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, कौशल आधारित और भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना है, ताकि विद्यार्थी बदलते डिजिटल और तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकें।


