एम्स ऋषिकेश में 53 पदों की पदोन्नति पर घमासान, भूख हड़ताल के बीच बिगड़ी एक कर्मी की तबीयत
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट (एएनएस) के 53 पदों पर पदोन्नति का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पदोन्नति आदेश वापस न लेने की मांग को लेकर नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर का आंदोलन रविवार को भी जारी रहा। वहीं, पांच नर्सिंगकर्मी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे रहे। इसी बीच एक भूख हड़ताली कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने की सूचना से आंदोलनकारी कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई।
दरअसल, एम्स प्रशासन ने 10 अक्टूबर 2026 को एएनएस के 53 पदों पर पदोन्नति के आदेश जारी किए थे। आदेश सामने आने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कुछ नर्सिंग ऑफिसरों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मामले में दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक पक्ष पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष आदेशों को नियमानुसार बताते हुए उन्हें यथावत रखने की मांग कर रहा है।
आरक्षण के आंकड़े गिनाकर पदोन्नति आदेश का किया बचाव
नर्सिंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (एनपीडीए) एम्स के अध्यक्ष नरेश चौधरी ने पदोन्नति आदेशों का समर्थन करते हुए कहा कि ये आदेश पूरी तरह प्रोविजनल और कंडीशनल हैं। उन्होंने बताया कि एम्स में वर्तमान में 85 असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट कार्यरत हैं। इनमें अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के 16 कर्मचारी शामिल हैं, जो कुल संख्या का 18.82 प्रतिशत है। वहीं, अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के आठ कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनकी हिस्सेदारी 9.41 प्रतिशत है।
चौधरी के मुताबिक, एससी वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण 15 प्रतिशत और एसटी वर्ग के लिए 7.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में ओपन मेरिट से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लंबित है। साथ ही, नैनीताल हाईकोर्ट का स्थगन आदेश भी प्रभावी है।
आंदोलन जारी, आगे की स्थिति पर टिकी निगाहें
पदोन्नति आदेश को लेकर कर्मचारियों के बीच जारी विवाद के बीच धरना और भूख हड़ताल लगातार जारी है। भूख हड़ताल पर बैठे पांच कर्मचारियों में से एक की तबीयत बिगड़ने की सूचना ने आंदोलन की गंभीरता बढ़ा दी है। फिलहाल, पदोन्नति आदेशों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। अब इस मामले में एम्स प्रशासन के अगले कदम और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।


