16 साल की किशोरी में मिला स्तन कैंसर, कम उम्र में बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
देहरादून। स्तन कैंसर को अब तक मुख्य रूप से अधिक उम्र की महिलाओं से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन बदलती उम्र में सामने आ रहे मामले इस धारणा पर नए सिरे से सोचने की जरूरत बता रहे हैं। उत्तराखंड में महज 16 वर्ष की किशोरी में स्तन कैंसर की पुष्टि होने का मामला सामने आया है। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर के अनुसार, इतनी कम उम्र में इस बीमारी का सामने आना दुर्लभ जरूर है, लेकिन यह स्तन स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की अहमियत को रेखांकित करता है।
40-50 की उम्र में भी सामने आ रहे मामले
डॉ. सुमिता प्रभाकर ने बताया कि भारत में पहले स्तन कैंसर के मामले अधिकतर 60 से 70 वर्ष की उम्र की महिलाओं में देखने को मिलते थे। हालांकि, पिछले करीब 25 वर्षों में 40 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं में भी इस बीमारी के मामले सामने आने लगे हैं। ऐसे में समय रहते जांच और शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि उनके पास देहरादून की 16 वर्षीय किशोरी में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई है। किशोरावस्था में स्तन कैंसर के मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं। इस उम्र में स्तनों में गांठ बनने के अधिकांश मामले गैर-कैंसरकारी होते हैं, लेकिन किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
पीरियड्स शुरू होने के बाद से रखें ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, लड़कियों को किशोरावस्था से ही अपने शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। स्तन में गांठ, आकार में असामान्य बदलाव, त्वचा में परिवर्तन या निप्पल से असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हालांकि, ऐसे लक्षण होने का मतलब यह नहीं है कि कैंसर ही है, क्योंकि इनके अन्य कारण भी हो सकते हैं।
35 वर्ष की उम्र से स्क्रीनिंग पर जोर
डॉ. प्रभाकर ने स्तन कैंसर से बचाव और समय पर पहचान के लिए नियमित जांच के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 35 वर्ष की उम्र से साल में एक बार स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी। हालांकि, स्क्रीनिंग की शुरुआत और अंतराल व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास तथा अन्य जोखिम कारकों के आधार पर चिकित्सक की सलाह से तय किए जाने चाहिए।
स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान से समय पर उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं और किशोरियां अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें और किसी भी असामान्य लक्षण को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें।


