अब AI के इस्तेमाल के साथ उसकी सच्चाई परखना भी सीखेंगे स्कूली बच्चे, NCERT का नया पाठ्यक्रम
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच स्कूली विद्यार्थियों को तकनीक की समझ के साथ उसकी चुनौतियों से परिचित कराने की दिशा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नई पहल की है। परिषद ने कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित 20 घंटे का परिचयात्मक मॉड्यूल तैयार किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को AI के इस्तेमाल के साथ-साथ इससे जुड़ी जिम्मेदारियों और जोखिमों को समझने के लिए तैयार करना है।
फर्जी वीडियो और ऑडियो की पहचान पर जोर
सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और डीपफेक वीडियो-ऑडियो के बढ़ते प्रसार के बीच इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को डिजिटल सामग्री की विश्वसनीयता परखने के तरीके सिखाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके जरिए छात्र यह समझ सकेंगे कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर तस्वीर, वीडियो या ऑडियो को बिना जांचे सच मान लेना उचित नहीं है।
मॉड्यूल में डाटा प्राइवेसी, ऑनलाइन जानकारी की सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण विषय भी शामिल किए गए हैं। इसका मकसद विद्यार्थियों में तकनीक के प्रति जागरूकता विकसित करना और उन्हें डिजिटल दुनिया में सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाना है।
बिना कंप्यूटर और इंटरनेट के भी सीख सकेंगे छात्र
इस पहल की खास बात यह है कि पाठ्यक्रम को गतिविधि आधारित स्वरूप में तैयार किया गया है। इसे इस तरह विकसित किया गया है कि कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा से वंचित स्कूलों के विद्यार्थी भी इसके माध्यम से विषय की बुनियादी अवधारणाओं को समझ सकें। इससे डिजिटल संसाधनों की कमी वाले विद्यालयों के छात्रों तक भी AI शिक्षा पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
IIT मद्रास और IIT जोधपुर का सहयोग
NCERT ने इस मॉड्यूल को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास और IIT जोधपुर के सहयोग से तैयार किया है। कंप्यूटेशनल थिंकिंग के माध्यम से विद्यार्थियों में समस्याओं को तार्किक ढंग से समझने, उनका विश्लेषण करने और समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है।
तकनीक के तेजी से बदलते दौर में यह पहल विद्यार्थियों को केवल AI आधारित टूल इस्तेमाल करने तक सीमित रखने के बजाय उनके सही, सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग की समझ देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और ऑनलाइन दुनिया में फैलने वाली गलत सूचनाओं के प्रति सतर्कता विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


