तपोवन में पानी की किल्लत से राहत अभी दूर, 50 किमी बिछेगी नई पेयजल लाइन
ऋषिकेश। तपोवन क्षेत्र में बढ़ती आबादी और पर्यटकों के दबाव के बीच पेयजल संकट जल्द खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र में नई पेयजल लाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है, लेकिन वन भूमि से जुड़ी अनुमति के कारण योजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है। जल निगम को करीब 0.9054 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल के लिए एनओसी का इंतजार है।
तपोवन में बीते कुछ वर्षों में होटल, होम स्टे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। इसके चलते यहां स्थानीय आबादी के साथ ही बड़ी संख्या में पहुंचने वाले पर्यटकों की पानी की जरूरत भी बढ़ गई है। वर्तमान में जल संस्थान ऋषिकेश की ओर से क्षेत्र को प्रतिदिन करीब दो एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि मांग सात एमएलडी से अधिक पहुंच चुकी है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच पांच एमएलडी से ज्यादा का अंतर बना हुआ है।
32 करोड़ की योजना से बदलेगी तस्वीर
पेयजल संकट से निपटने के लिए पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, मुनिकीरेती की ओर से करीब 32 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसके तहत तपोवन क्षेत्र में लगभग 50 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन बिछाई जानी है। योजना में करीब चार किलोमीटर लंबी राइजिंग लाइन भी शामिल है।
जल निगम ने इस साल फरवरी में योजना पर काम शुरू किया था। अब तक करीब 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि, पर्यटक क्षेत्र होने के कारण निर्माण कार्य को कई स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य सड़क पर खुदाई के लिए अनुमति मिलने में भी कई बार परेशानी सामने आ रही है।
वन भूमि की एनओसी बनी अड़चन
योजना के एक हिस्से के लिए वन विभाग की भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए जल निगम ने वन विभाग को प्रस्ताव भेजकर एनओसी मांगी थी। विभाग ने प्रस्ताव की जांच के बाद कुछ आपत्तियां लगाकर फाइल वापस भेज दी है। अब निगम इन आपत्तियों का निस्तारण करने में जुटा है।
अधिकारियों का कहना है कि वन भूमि से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद योजना के शेष कार्य को गति देने का प्रयास किया जाएगा। नई लाइन बिछने के बाद क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की क्षमता बढ़ने और मौजूदा संकट में राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल तपोवन के लोगों और कारोबारियों को पर्याप्त पानी के लिए योजना पूरी होने का इंतजार करना होगा।


