जर्मनी में पढ़ाई और रिसर्च कर सकेंगे उत्तराखंड के छात्र, संयुक्त डिग्री पर भी मंथन

खबर शेयर करें -

देहरादून: उत्तराखंड के विद्यार्थियों के लिए जर्मनी में उच्च शिक्षा और शोध के नए अवसर खुलने की तैयारी है। इसके लिए उत्तराखंड और जर्मनी के ब्रांडेनबर्ग राज्य के बीच हुए संयुक्त घोषणा पत्र (जेडआइ) को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो गई है। बुधवार को सचिवालय में हुई पहली बैठक में दोनों पक्षों के विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक और शोध सहयोग को आगे बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में छात्र-शिक्षक एक्सचेंज, संयुक्त शोध परियोजनाओं, ड्यूल डिग्री और जर्मन भाषा के पाठ्यक्रम शुरू करने जैसे प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही कौशल विकास, स्टार्टअप और एमएसएमई के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि उत्तराखंड और ब्रांडेनबर्ग के बीच बनी साझेदारी को अब व्यावहारिक शैक्षणिक एवं शोध अवसरों में बदलने की जरूरत है। उन्होंने दोनों पक्षों के संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाकर ठोस कार्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया।

वीएमएसबीयूटीयू और पाट्सडैम विश्वविद्यालय होंगे प्रमुख संस्थान

इस पहल को आगे बढ़ाने में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीएमएसबीयूटीयू) और यूनिवर्सिटी आफ पाट्सडैम, ब्रांडेनबर्ग मुख्य भूमिका निभाएंगे। वहीं आइआइटी रुड़की ज्ञान साझेदार के तौर पर सहयोग करेगा। इससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन और शोध का अनुभव हासिल करने के अवसर मिलने की उम्मीद है।

वीएमएसबीयूटीयू की कुलपति डा. तृप्ता ठाकुर ने जर्मन भाषा के प्रशिक्षण, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को अहम क्षेत्र बताया। वहीं आइआइटी रुड़की के डीन, स्पान्सर्ड रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी विवेक के. मलिक ने कौशल विकास के साथ छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने, स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग की जरूरत बताई।

जल विज्ञान विभाग के प्रो. अंकित अग्रवाल ने इस साझेदारी को अल्पकालिक कार्यक्रमों तक सीमित न रखकर अगले पांच से दस वर्षों के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की बात कही। यूनिवर्सिटी आफ पाट्सडैम के प्रो. एक्सल ब्रॉस्टर्ट ने दोनों पक्षों की विशेषज्ञता और संसाधनों को जोड़कर सहयोग के नए क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिया।

फिलहाल बैठक में संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ है। आने वाले चरण में इन्हें ठोस शैक्षणिक कार्यक्रमों और शोध परियोजनाओं का रूप देने की दिशा में काम किया जाएगा।

Ad