प्रतीतनगर रामलीला में शूर्पणखा नासिका छेदन और खर-दूषण वध का मंचन, रावण-मारीच संवाद ने बांधा समां

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रायवाला। प्रतीतनगर गांव के वार्ड नंबर 6 स्थित प्राथमिक विद्यालय, श्री रामलीला चौक में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्री रामलीला महोत्सव में बुधवार को पंचवटी प्रसंग, शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और रावण-मारीच संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ दिया।

रामलीला में अत्रि एवं श्रृंगी आश्रम, श्रीराम-जटायु भेंट, पंचवटी, सुंदरी शूर्पणखा एवं राक्षसी शूर्पणखा, खर-दूषण वध तथा रावण-मारीच संवाद सहित छह प्रमुख दृश्यों का मंचन किया गया।

शूर्पणखा के प्रस्ताव को ठुकराने से शुरू हुआ घटनाक्रम

रामलीला के मुख्य मंच उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता वीरेंद्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि मंचन की शुरुआत में भरत से मिलने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन यात्रा आगे बढ़ाने का प्रसंग दिखाया गया। वन में ऋषि अत्रि के आश्रम पहुंचने पर उनका आदर-सत्कार किया जाता है। माता अनुसूया सीता को पत्नी धर्म का ज्ञान देती हैं और उन्हें वस्त्र एवं आभूषण भेंट करती हैं।

इसके बाद श्रीराम की जटायु से भेंट और पंचवटी में पर्णकुटी निर्माण का दृश्य प्रस्तुत किया गया। पंचवटी में राक्षसी शूर्पणखा भगवान श्रीराम पर मोहित होकर उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम के इनकार करने पर वह लक्ष्मण के पास जाती है। दोनों भाइयों से निराश होकर शूर्पणखा अपने वास्तविक राक्षसी रूप में माता सीता पर हमला करने का प्रयास करती है। इस दौरान लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने का प्रसंग मंचित किया गया।

खर-दूषण वध का हुआ रोमांचक मंचन

शूर्पणखा अपने अपमान का बदला लेने के लिए भाइयों खर और दूषण के पास पहुंचती है और उन्हें श्रीराम-लक्ष्मण के विरुद्ध भड़काती है। इसके बाद खर-दूषण अपनी सेना के साथ राम पर आक्रमण करते हैं। युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा राक्षसों का संहार और खर-दूषण वध का मंचन किया गया। कलाकारों ने युद्ध के दृश्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने सराहा।

रावण-मारीच संवाद ने दिखाई आगे के घटनाक्रम की भूमिका

शूर्पणखा के अपमान का समाचार मिलने पर रावण क्रोधित हो जाता है। विभीषण उसे बिना पूरी जानकारी के कोई निर्णय नहीं लेने की सलाह देता है, लेकिन शूर्पणखा की बातों में आकर रावण सीता हरण की योजना बनाता है। इसके लिए वह अपने मामा मारीच से सहायता मांगता है। श्रीराम की शक्ति से परिचित मारीच रावण को समझाने का प्रयास करता है, लेकिन रावण के दबाव में उसकी बात मान लेता है। इस प्रसंग के साथ रामलीला में आगे होने वाले सीता हरण की भूमिका प्रस्तुत की गई।

अतिथियों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, पौड़ी गढ़वाल के ब्लॉक प्रमुख के प्रतिनिधि एवं नमामि गंगे के प्रदेश सहसंयोजक संजीव चौहान तथा हरिपुर कलां की ग्राम प्रधान सविता शर्मा को लोक कल्याण समिति की ओर से रामदरबार की माला, प्रतीक चिह्न और रामदरबार का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध, त्रिसरा प्रसंग और रावण-मारीच संवाद के दौरान कलाकारों के गायन एवं अभिनय की दर्शकों ने सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित सैकड़ों रामभक्तों ने रामलीला का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। वहीं, देश-विदेश में रह रहे लोगों ने ऑनलाइन प्रसारण के माध्यम से रामलीला देखी और संदेशों के जरिए मंचन की प्रशंसा की।

इस अवसर पर समिति के प्रवक्ता वीरेंद्र नौटियाल (वीरू), मुख्य निर्देशक महेंद्र राणा, अध्यक्ष गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी सहित समिति के सदस्य, पदाधिकारी और सैकड़ों रामभक्त उपस्थित रहे।

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