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देहरादून : उत्तराखंड सरकार प्रदेश के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में दक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार शिक्षकों के लिए एक विशेष सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) कार्यक्रम विकसित करेगी, जिसका उद्देश्य उन्हें उन्नत डिजिटल तकनीकों से सशक्त बनाकर कक्षा शिक्षण को आधुनिक एआई आधारित नवाचारों से जोड़ना है। इस पहल से छात्रों के सीखने के परिणामों में गुणात्मक सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर विकसित मॉडल के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसमें शिक्षकों को एआई की मूलभूत समझ, डिजिटल टूल्स का प्रभावी उपयोग, डेटा आधारित मूल्यांकन प्रणाली, स्मार्ट कंटेंट निर्माण और व्यक्तिगत शिक्षण (पर्सनलाइज्ड लर्निंग) जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे शिक्षक विद्यार्थियों की सीखने की गति और क्षमता के अनुरूप शिक्षण पद्धति अपनाने में सक्षम होंगे।

राज्य के लगभग 13,825 सरकारी स्कूलों में इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से जोड़ा जाएगा। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के शिक्षक भी समान रूप से लाभान्वित हो सकें। शिक्षा विभाग का मानना है कि एआई आधारित शिक्षण पद्धति से छात्रों की अवधारणात्मक समझ मजबूत होगी, साथ ही उनकी रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता में भी वृद्धि होगी। एआई टूल्स के माध्यम से छात्रों की प्रगति का विश्लेषण कर कमजोर विषयों की पहचान की जा सकेगी और समय रहते आवश्यक शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल साक्षरता और एआई की समझ अत्यंत आवश्यक हो गई है। ऐसे में शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है। यह पहल न केवल शिक्षण प्रक्रिया को आधुनिक बनाएगी, बल्कि राज्य की शिक्षा गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड को डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल किया जाए। आने वाले समय में एआई आधारित पाठ्य सामग्री, वर्चुअल लैब और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाओं को भी विद्यालयों में बढ़ावा दिया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी पहल से उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा तथा शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

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