हल्द्वानी में पहली बार उच्च हिमालयी गुच्छी मशरूम का कृत्रिम उत्पादन सफल
हल्द्वानी : उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली दुर्लभ और अत्यधिक मूल्यवान गुच्छी मशरूम का कृत्रिम उत्पादन हल्द्वानी के फतेहपुर क्षेत्र में सफलतापूर्वक किया गया है। यह उपलब्धि नवीन वर्मा, डॉ. जीएस मेर और अनूप शाह के नेतृत्व में एक वर्ष तक चले गहन शोध और प्रयोगों के बाद संभव हो पाई है।
गुच्छी मशरूम को दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ मशरूम प्रजातियों में गिना जाता है। यह सामान्यतः 7000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने के बाद प्राकृतिक रूप से उगती है। सीमित उत्पादन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसकी बाजार में भारी मांग रहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत हजारों रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। शोध टीम ने वैज्ञानिक पद्धति से नियंत्रित वातावरण तैयार कर गुच्छी मशरूम का सफल उत्पादन किया। यह प्रयोग उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए एक नई आर्थिक संभावना खोलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक से स्थानीय किसान भी नियंत्रित परिस्थितियों में गुच्छी का उत्पादन कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
डॉ. जीएस मेर ने बताया कि गुच्छी मशरूम में अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शरीर को ऊर्जा प्रदान करने और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों में इसके गुणों पर शोध जारी है। शोधकर्ताओं ने 7000 फीट की ऊंचाई पर इसकी चार उन्नत किस्में भी विकसित की हैं, जो स्थानीय जलवायु के अनुरूप बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं। इन किस्मों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि वे तापमान और नमी के बदलाव को सहन कर सकें और स्थिर उत्पादन दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया गया तो उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पलायन की समस्या से जूझ रहे गांवों के लिए यह एक मजबूत आर्थिक विकल्प साबित हो सकता है। साथ ही, राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है।
फिलहाल शोध टीम इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस उच्च मूल्य की फसल से जुड़ सकें। यह सफलता उत्तराखंड को मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
