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चमोली : औली में इन दिनों हो रही भारी बर्फबारी ने जहां पर्यटकों के लिए बर्फीले नज़ारों का आकर्षण बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी ओर यहां के मवेशियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लगातार बर्फ जमने से ऊपरी इलाकों में घास और चारे के स्रोत पूरी तरह ढक गए हैं, जिसके चलते दर्जनों मवेशी भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि सर्दियों की शुरुआत में कई पशुपालक अपने मवेशियों को औली के आसपास खुले चरागाहों में छोड़कर निचले क्षेत्रों में लौट गए थे। लेकिन इस बार अपेक्षा से अधिक और लगातार हो रही बर्फबारी के कारण ये मवेशी वापस नहीं लाए जा सके। नतीजतन अब ये जानवर बिना पर्याप्त चारे, पानी और आश्रय के कड़ाके की ठंड में बेसहारा हालत में घूम रहे हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए औली के कुछ होटल व्यवसायी आगे आए और उन्होंने पहल करते हुए कई मवेशियों को अपने स्तर पर सुरक्षित रूप से निचले इलाकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता तो कई जानवर भूख और ठंड के कारण दम तोड़ सकते थे।

समाजसेवी रविंद्र कंडारी ने इस पूरे मामले को लेकर नगर पालिका प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इन बेजुबान जानवरों के लिए भोजन, पानी और सुरक्षित ठिकाने की समुचित व्यवस्था किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि फिलहाल सभी मवेशियों को ‘गो सेवा सदन’ या किसी सुरक्षित गौशाला में रखा जाए, जहां नियमित देखभाल संभव हो सके।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार बर्फबारी के कारण औली क्षेत्र में आवागमन भी प्रभावित है, जिससे पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों तक पहुंच पाना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में प्रशासनिक मदद के बिना इस समस्या का समाधान मुश्किल नजर आ रहा है।

अब निगाहें नगर पालिका और जिला प्रशासन के कदमों पर टिकी हैं कि वे इस मानवीय और पशु-कल्याण से जुड़े मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। यदि जल्द समुचित इंतजाम नहीं किए गए तो कड़ाके की सर्दी और चारे की कमी इन बेसहारा मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

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