बाबा महाकाल की नगरी में आध्यात्मिक होली का उत्सव
उज्जैन : धर्मनगरी उज्जैन में होली का पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विराट उत्सव है। मान्यता है कि दुनिया में सबसे पहले होली की शुरुआत उज्जैन के राजा महाकाल के दरबार से होती है। यहां भगवान महाकालेश्वर को नगर का राजा माना जाता है और हर प्रमुख उत्सव की शुरुआत उनके आशीर्वाद से ही होती है।इस वर्ष 3 मार्च को होलिका दहन के अवसर पर महाकाल मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। सुबह की प्रसिद्ध भस्म आरती से लेकर रात्रि के होलिका दहन तक, पूरा मंदिर परिसर भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा रहेगा।
महाकाल मंदिर की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। होली के अवसर पर यह आरती और भी विशेष हो जाती है। तड़के ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती में बाबा महाकाल का श्रृंगार विशेष रूप से किया जाता है। गुलाल और अबीर से सजे दरबार में जब मंत्रोच्चार गूंजता है, तो वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। मान्यता है कि महाकाल को सबसे पहले गुलाल अर्पित किया जाता है, उसके बाद ही उज्जैन सहित पूरे देश में रंगोत्सव का आरंभ माना जाता है।
3 मार्च की रात्रि को महाकाल मंदिर परिसर में विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह आयोजन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। मंदिर के पुजारी वैदिक मंत्रों के साथ पूजा-अर्चना करेंगे, जिसके बाद होलिका प्रज्ज्वलित की जाएगी।
यहां की परंपरा के अनुसार, सबसे पहले महाकाल के दरबार में होलिका दहन होता है और फिर शहर के अन्य स्थानों पर यह अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं।
होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी पर बाबा महाकाल को रंग-गुलाल अर्पित किया जाता है। भक्तगण ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ उत्सव मनाते हैं। मंदिर परिसर में फूलों और रंगों की वर्षा के बीच भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है।उज्जैन की यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे देखने देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रशासन भी सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम करता है ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन कर सकें।
महाकाल की होली केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान भी है। यहां होली का उत्सव आध्यात्मिक अनुशासन और उल्लास का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। जब महाकाल के दरबार में सबसे पहले रंग चढ़ता है, तो यह संदेश जाता है कि जीवन में हर अंधकार के बाद रंग और प्रकाश अवश्य आता है। यही कारण है कि उज्जैन की होली को विशेष और अद्भुत माना जाता है।
