काठगोदाम नैनीताल हाईवे पर 17,400 पेड़ों के कटान पर केंद्र सख्त
नैनीताल : काठगोदाम से नैनीताल तक प्रस्तावित हाईवे चौड़ीकरण परियोजना में करीब 17,400 पेड़ों के कटान की आशंका को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) प्राधिकरण को परियोजना क्षेत्र का दोबारा विस्तृत सर्वेक्षण करने और पेड़ों की वास्तविक संख्या व वैकल्पिक विकल्पों का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान का अनुमान जताया गया था, जिस पर पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों ने चिंता व्यक्त की थी। नैनीताल जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से भूस्खलन, जलस्रोतों पर प्रभाव और जैव विविधता को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि परियोजना को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाएगा। मंत्रालय ने एनएच से कहा है कि वह सड़क चौड़ीकरण के लिए ऐसे विकल्प तलाशे, जिनसे पेड़ों की कटाई न्यूनतम हो। साथ ही, जहां कटान अपरिहार्य हो, वहां प्रतिपूरक वनीकरण की ठोस योजना भी प्रस्तुत की जाए।
स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। उनका सुझाव है कि सड़क का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया जाए कि पहाड़ी ढलानों और घने वन क्षेत्रों को कम से कम नुकसान पहुंचे। कुछ विशेषज्ञों ने एलिवेटेड रोड या सीमित चौड़ीकरण जैसे विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही है।
एनएच प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार पुनः सर्वेक्षण कराया जाएगा और विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र ही प्रस्तुत की जाएगी। सर्वे में पेड़ों की प्रजाति, आयु और पारिस्थितिक महत्व का भी आकलन किया जाएगा।गौरतलब है कि काठगोदाम–नैनीताल मार्ग पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर साल लाखों पर्यटक इस मार्ग से नैनीताल पहुंचते हैं। सड़क चौड़ीकरण से यातायात सुगम होने की उम्मीद है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अब सभी की निगाहें पुनः सर्वेक्षण की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि परियोजना किस स्वरूप में आगे बढ़ेगी और पर्यावरणीय क्षति को किस हद तक रोका जा सकेगा।
