हरिद्वार में 5000 साधकों की दंडवत यात्रा, सनातन संस्कृति और गंगा संरक्षण का देंगे संदेश

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30 अक्टूबर को कनखल से होगा शुभारंभ, 17 घंटे तक चलने वाली यात्रा में चार हजार स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्थाएं

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार, राष्ट्रीय एकता और मां गंगा की स्वच्छता के उद्देश्य से पांच हजार साधक दंडवत यात्रा में शामिल होंगे। महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महाराज के नेतृत्व में यह यात्रा 30 अक्टूबर को कनखल से शुरू होगी। यात्रा के जरिए आगामी अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के साथ लोगों को धर्म, सेवा, स्वच्छता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक एवं मिश्री मठ के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महाराज के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा गया है। आयोजकों का उद्देश्य श्रद्धालुओं और विशेष रूप से युवाओं को सनातन परंपराओं, नैतिक मूल्यों तथा गंगा संरक्षण के महत्व से परिचित कराना है।

भगवान दक्षेश्वर महादेव के रुद्राभिषेक से होगी शुरुआत

यात्रा के शुभारंभ से पहले कनखल स्थित भगवान दक्षेश्वर महादेव मंदिर में विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नया अखाड़ा उदासीन, कनखल से दंडवत यात्रा प्रारंभ होगी। आयोजकों के अनुसार, यह यात्रा 30 अक्टूबर की सुबह से 31 अक्टूबर की सुबह तक चलेगी और इसकी कुल अवधि लगभग 17 घंटे होगी।

यात्रा के माध्यम से अर्धकुंभ के आयोजन को लेकर धार्मिक वातावरण तैयार करने और अधिक से अधिक लोगों को जनभागीदारी के लिए प्रेरित करने की योजना है। संत परंपरा, आध्यात्मिक एकता और भारतीय संस्कृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना भी इसका प्रमुख उद्देश्य रहेगा।

गंगा स्वच्छता के लिए चलेगा विशेष अभियान

यात्रा के क्रम में 31 अक्टूबर को गंगा सेवा अभियान के अंतर्गत हजारों स्वयंसेवक विशेष स्वच्छता अभियान में भाग लेंगे। इसके बाद शाम को गंगा आरती के माध्यम से मां गंगा की निर्मलता, संरक्षण और स्वच्छता का संदेश दिया जाएगा।

आयोजकों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी बढ़ती है, जब उनके साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्वों को भी महत्व दिया जाए। इसी सोच के तहत श्रद्धालुओं को गंगा को स्वच्छ रखने और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

चार हजार स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्था

मिश्री मठ के प्रबंधक डॉ. उमेश सचान के अनुसार, लगभग पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा में व्यवस्थाओं के संचालन के लिए चार हजार स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार एंबुलेंस भी यात्रा के साथ रहेंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।

अर्धकुंभ से पहले जनजागरण पर जोर

हरिद्वार में आयोजित होने वाली यह दंडवत यात्रा धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता, सेवा और सांस्कृतिक चेतना को जोड़ने की पहल है। आयोजकों को उम्मीद है कि इसके माध्यम से अर्धकुंभ की तैयारियों को लेकर सकारात्मक वातावरण बनेगा और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ेगी। सनातन संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ मां गंगा के संरक्षण का संकल्प मजबूत करना भी इस आयोजन का अहम उद्देश्य है।

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