समर्थ पोर्टल पर अंकों की गड़बड़ी से मिलेगी राहत, कॉलेजों को मिलेगा यूजर आइडी संचालन का अधिकार

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ऋषिकेशः श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल पर विद्यार्थियों के अंकों में होने वाली गड़बड़ियों को दूर करने के लिए व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंकों में सुधार के लिए विश्वविद्यालय मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने एकल एडमिन आइडी की व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर ऋषिकेश परिसर सहित अन्य संबद्ध महाविद्यालयों को स्थानीय स्तर पर यूजर आइडी संचालन का अधिकार दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से समर्थ पोर्टल पर अंकों से संबंधित त्रुटियों के निस्तारण की प्रक्रिया आसान और तेज होगी। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अनावश्यक भागदौड़ से भी राहत मिलेगी।

अंकों की त्रुटियों से परेशान हो रहे विद्यार्थी

दरअसल, समर्थ पोर्टल पर आंतरिक मूल्यांकन और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक दर्ज होने के दौरान तकनीकी खामियों और मानवीय भूल के कारण कई बार गलतियां सामने आती हैं। इन त्रुटियों का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। अंक गलत दर्ज होने या उनमें संशोधन की जरूरत पड़ने पर विद्यार्थी परिसर और महाविद्यालय प्रशासन से शिकायत करते हैं, लेकिन पोर्टल संचालन का अधिकार उच्च स्तर पर होने के कारण स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हो पाता।

ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए विश्वविद्यालय मुख्यालय तक जाना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा खर्च होने के साथ ही मानसिक परेशानी भी बढ़ती है। परीक्षा संबंधी कार्यों में देरी से विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

हर विभाग और संबंधित शिक्षक को मिलेगी अलग आइडी

विद्यार्थियों की इन समस्याओं को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अंबरीश कुमार महाजन ने समर्थ पोर्टल की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक संस्थान के हर विभाग और संबंधित शिक्षक को अलग यूजर आइडी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

इससे अंकों से संबंधित शिकायतों की जांच और आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर संचालित करने में मदद मिलेगी। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यालय पर निर्भर न रहना पड़े और संबंधित संस्थान में ही उनकी शिकायतों का निस्तारण हो सके।

प्रशासनिक प्रक्रिया होगी आसान

समर्थ पोर्टल के संचालन में विकेंद्रीकरण से महाविद्यालयों की जिम्मेदारी बढ़ने के साथ ही शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया भी अधिक सुगम होने की उम्मीद है। यदि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो विद्यार्थियों को अंकों में सुधार के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे परीक्षा संबंधी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने और विद्यार्थियों की परेशानी कम करने में भी मदद मिल सकती है।

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