डीएम आशीष चौहान ने की अर्द्धकुंभ परियोजनाओं की समीक्षा
देहरादून। आगामी अर्द्धकुंभ मेला-2027 की तैयारियों को गति देते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला गंगा समिति की मासिक बैठक में ऋषिकेश क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में त्रिवेणी घाट पुनर्विकास, चंद्रभागा पैदल पुल, आस्था पथ सौंदर्यीकरण तथा गंगा तट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।
बैठक में नगर निगम ऋषिकेश द्वारा अर्द्धकुंभ-2027 के लिए लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विकास कार्यों का प्रस्तुतीकरण दिया गया। वहीं उत्तराखंड जल संस्थान, सिंचाई विभाग, यूयूएसडीए और अन्य कार्यदायी संस्थाओं ने अपनी-अपनी परियोजनाओं की प्रगति से अवगत कराया।
त्रिवेणी घाट पुनर्विकास योजना के तहत घाट को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों के अनुरूप आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव में अनुष्ठान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित करने, बाढ़ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संरचनात्मक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा त्रिवेणी घाट से मां सरस्वती मंदिर तक सौंदर्यीकरण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा बैठने की व्यवस्था, गतिविधि क्षेत्र और अन्य जनसुविधाओं को भी विकसित किया जाएगा।
बैठक में चंद्रभागा पैदल पुल परियोजना की समीक्षा करते हुए इसे अधिक सुरक्षित, आकर्षक और पर्यटकों के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही विभिन्न घाटों के पुनर्विकास, नदी तट संरक्षण और पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई।डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा अनुमोदन और निविदा प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में केएफडब्ल्यू (KfW) वित्तपोषित एकीकृत शहरी अवसंरचना विकास परियोजना की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत ऋषिकेश, मुनिकीरेती, तपोवन और स्वर्गाश्रम क्षेत्रों में पेयजल, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटिंग, विद्युत बस अवसंरचना और जल निकासी जैसी सुविधाओं के विकास कार्यों की स्थिति पर चर्चा हुई।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि अर्द्धकुंभ-2027 से जुड़ी सभी परियोजनाएं श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऋषिकेश की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान को नई मजबूती देंगी। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए त्रिवेणी घाट स्थित गंगा संग्रहालय के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
