प्रदेश में इको टूरिज्म को मिलेगा नया आयाम, ट्रैकिंग पर्वतारोहण नीति 10 दिन में होगी तैयार

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देहरादून: प्रदेश में इको टूरिज्म की अपार संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इको टूरिज्म की उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेशभर में ऐसे इको टूरिज्म स्पॉट चिह्नित कर विकसित किए जाएं, जहां इको टूरिज्म के लिए एक मजबूत और सतत इको सिस्टम तैयार किया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि ट्रैकिंग और पर्वतारोहण से जुड़ी एकीकृत नीति को अगले दस दिनों के भीतर अंतिम रूप देकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि नीति तैयार करते समय सभी संबंधित हितधारकों स्थानीय समुदाय, टूर ऑपरेटर, पर्वतारोहण संस्थाएं और पर्यावरण विशेषज्ञ से संवाद किया जाए, ताकि भविष्य में व्यावहारिक समस्याओं से बचा जा सके।

बैठक में नई पर्वत चोटियों को खोले जाने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी नई चोटी को खोलने से पहले पर्यावरण ऑडिट सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएं। इसके लिए स्पष्ट और पारदर्शी एसओपी भी जारी की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने ऋषिकेश स्थित ऐतिहासिक चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कार्यदायी संस्था से कहा कि हर कार्य के लिए समय-सीमा तय की जाए और उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर निर्धारित समय में कार्य पूर्ण किया जाए, ताकि यह स्थल जल्द ही पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म के क्षेत्र में सफल जबरखेत मॉडल को अन्य चिह्नित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी डीएफओ को यह लक्ष्य दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इको टूरिज्म को विकसित करने की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करें। प्रत्येक डीएफओ को अपने क्षेत्र के कम से कम 10 चिह्नित स्थानों का विकास प्लान एक माह के भीतर तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इको टूरिज्म की उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जाएगी, ताकि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जा सके। इसके अलावा प्रदेशभर में पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने पर भी जोर दिया गया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशिक्षित और प्रमाणित मानव संसाधन से न केवल पर्यटन की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी मिलेंगे।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि इको टूरिज्म का विकास केवल पर्यटन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और सतत विकास को सुनिश्चित करना है। सरकार इस दिशा में सुनियोजित और संतुलित कदम उठाते हुए प्रदेश को इको टूरिज्म का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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