पांच छात्राओं से 250 बेटियों तक पहुंचा शिक्षा का कारवां, श्री मां ट्रस्ट बना जरूरतमंद बालिकाओं का सहारा

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रायवाला। आर्थिक अभाव के कारण किसी बेटी की पढ़ाई न छूटे और उसे अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिले, इसी उद्देश्य के साथ श्री मां ट्रस्ट बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटा है। हरिपुरकलां स्थित कन्या विद्यालय में जरूरतमंद परिवारों की बालिकाओं को निश्शुल्क शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कार, तकनीकी ज्ञान और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यालय का लक्ष्य बेटियों को शिक्षित बनाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना भी है।

वर्ष 2012 में महज पांच छात्राओं के साथ शुरू हुई यह पहल आज 250 बालिकाओं तक पहुंच चुकी है। यह सफर न केवल विद्यालय के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण भी है, जिनके लिए आर्थिक तंगी के बीच बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है। विद्यालय में पहली से आठवीं कक्षा तक शिक्षा की व्यवस्था है, जिससे बालिकाओं को अपने शुरुआती शैक्षणिक वर्ष पूरे करने के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

शिक्षा के साथ जरूरी सुविधाएं भी निश्शुल्क

विद्यालय की ओर से छात्राओं को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से ड्रेस, कापी-किताबें और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी निश्शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इससे जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से दूर होने से बचाने में मदद मिलती है। साथ ही, उनकी शिक्षा निरंतर जारी रखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।

संस्कार और तकनीकी ज्ञान पर भी जोर

विद्यालय में शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय बालिकाओं के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्हें संस्कारों के साथ तकनीकी ज्ञान और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे बदलते समय की जरूरतों को समझ सकें और भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।

श्री मां ट्रस्ट की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियां भी शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। पांच छात्राओं से शुरू हुआ यह विद्यालय आज सैकड़ों बालिकाओं के भविष्य को दिशा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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