उत्तराखंड में अतिवृष्टि-ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान, किसानों की मदद के लिए सर्वे के निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड में हालिया बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ की फसलों के साथ बागवानी को भी नुकसान पहुंचा है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण कराने और नुकसान का वास्तविक आकलन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जा सके।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विभागीय अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के साथ मौके पर जाकर फसलों की स्थिति का निरीक्षण करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नुकसान के आकलन में वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखा जाए और किसानों को सहायता दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई प्राथमिकता से की जाए।
8,372 हेक्टेयर से अधिक कृषि क्षेत्र प्रभावित
प्रदेश में इस वर्ष प्राकृतिक आपदा के कारण खरीफ की फसलें 8,372.31 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रभावित हुई हैं। ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर और गदरपुर में सबसे अधिक नुकसान सामने आया है। यहां करीब 7,730 हेक्टेयर क्षेत्र में धान और गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। वहीं, हरिद्वार जिले की बहादराबाद, बादशाहपुर और जमालपुर न्याय पंचायतों में लगभग 600 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलों को क्षति पहुंची है। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से धान की फसल प्रभावित हुई है।
पहाड़ी जिलों में बागवानी को भी नुकसान
बारिश और ओलावृष्टि का असर पर्वतीय क्षेत्रों की बागवानी फसलों पर भी पड़ा है। अल्मोड़ा के चौखुटिया और लमगड़ा में फसलों को 15 से 70 प्रतिशत तक नुकसान होने का आकलन किया गया है। चंपावत के विभिन्न विकासखंडों में क्षति 33 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।
इसके अलावा देहरादून के रायपुर क्षेत्र में 10 से 15 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग में करीब 20 प्रतिशत और टिहरी के घनसाली में लगभग 30 प्रतिशत नुकसान का आकलन हुआ है। पौड़ी जिले के नैनीडांडा और रिखणीखाल में भी फसलों को करीब 30 प्रतिशत तक क्षति पहुंची है।
नौ अक्टूबर की आपदा के बाद मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
प्रदेश में नौ अक्टूबर को हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से भी कई क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ। प्राकृतिक आपदा ने फसलों के साथ जन-धन, पशुधन, मकानों और अन्य संपत्तियों को भी प्रभावित किया है।
इस मामले में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने विभागीय सचिव को पत्र लिखकर प्रभावित इलाकों में तत्काल सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नुकसान का आकलन कर प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
मंत्री के निर्देशों के बाद सचिव विनोद कुमार सुमन की ओर से सभी जिलों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। अब सर्वेक्षण के आधार पर आपदा से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों और अन्य लोगों को राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।


