शिक्षक नरेन्द्र खुराना का विद्यार्थियों को प्रेरणादायी संदेश

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ऋषिकेश: समाजसेवी एवं अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित शिक्षाविद शिक्षक नरेन्द्र खुराना ने विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी को लेकर एक प्रेरणादायी संदेश देते हुए उन्हें अनुशासन, परिश्रम और आत्मसंयम का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मोबाइल फोन और सोशल मीडिया है, जो उनके लक्ष्य से ध्यान भटकाने का कार्य कर रहा है। यदि छात्र मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आवश्यक दूरी बना लें, तो वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

नरेन्द्र खुराना ने हाल ही में गाजियाबाद में तीन सगी बहनों द्वारा सामूहिक आत्महत्या की दुखद घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समाज और विशेष रूप से युवाओं के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी जितना समय मोबाइल स्क्रीन पर व्यतीत करता है, यदि उसका आधा समय भी पुस्तकों और अध्ययन को दे दे, तो सफलता स्वयं उसके कदम चूमेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय का सही विभाजन, नियमित अध्ययन और आत्मअनुशासन ही एक उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।

विद्यार्थियों के बीच अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए नरेन्द्र खुराना ने बताया कि उन्होंने इंटरमीडिएट से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तथा बी.एड. तक की सभी परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी चमत्कार का परिणाम नहीं है, बल्कि निरंतर परिश्रम, स्पष्ट लक्ष्य और अध्ययन के प्रति पूर्ण समर्पण का फल है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए, तो कोई भी परीक्षा कठिन नहीं होती।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह धैर्य, आत्मविश्वास और मेहनत की सच्ची परीक्षा होती है। जो विद्यार्थी समय का सम्मान करता है, समय भी उसे सफलता के रूप में सम्मान देता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया क्षणिक आकर्षण और तात्कालिक आनंद तो देता है, लेकिन शिक्षा वह शक्ति है जो जीवन भर साथ निभाती है और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है।

अंत में नरेन्द्र खुराना ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि यदि वे आज स्वयं पर नियंत्रण रखना सीख लें, अपने समय का सही उपयोग करें और लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें, तो भविष्य में उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उनका यह संदेश विद्यार्थियों के लिए न केवल परीक्षा की दृष्टि से, बल्कि जीवन निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन साबित हुआ।

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