नेपाल से उत्तराखंड तक गूंज रही कुकुर तिहार की परंपरा, गोरखा समाज ने दिखाया बेजुबान जानवरों के प्रति प्रेम और सम्मान
देहरादून: दीपावली के उल्लास के बीच पड़ोसी देश नेपाल में रविवार, 8 नवंबर को अनोखा पर्व ‘कुकुर तिहार’ मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसान और जानवरों के बीच प्रेम, विश्वास और वफादारी के रिश्ते का प्रतीक है। नेपाल की संस्कृति से जुड़ा यह विशेष त्योहार उत्तराखंड में रहने वाले नेपाली और गोरखा समाज के लिए भी सांस्कृतिक महत्व रखता है।
उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में नेपाली मूल और गोरखा समुदाय के लोग रहते हैं। अपनी भाषा, खानपान, लोक परंपराओं और त्योहारों के माध्यम से यह समुदाय आज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। कुकुर तिहार भी ऐसी ही परंपराओं में शामिल है, जो पशुओं के प्रति प्रेम और सम्मान का संदेश देती है।
कुत्तों को तिलक लगाकर पहनाई जाती है गेंदे की माला
कुकुर तिहार के दिन कुत्तों को विशेष सम्मान दिया जाता है। सुबह से ही उन्हें स्नान कराकर माथे पर लाल टीका लगाया जाता है और गले में गेंदे के फूलों की माला पहनाई जाती है। इसके बाद उन्हें स्वादिष्ट भोजन और पकवान खिलाए जाते हैं। इस परंपरा में घरों में पाले जाने वाले कुत्तों के साथ-साथ सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्तों को भी शामिल किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है परंपरा
हिंदू मान्यताओं में कुत्तों का संबंध भगवान भैरव और यमराज से माना जाता है। इन्हें वफादारी, सुरक्षा और सतर्कता का प्रतीक भी समझा जाता है। मान्यता के अनुसार, कुत्तों का सम्मान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि तिहार के दौरान उनके लिए विशेष दिन निर्धारित किया गया है।
गोरखा और नेपाली संस्कृति की खूबसूरत पहचान
नेपाल में तिहार पांच दिनों तक मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इसमें कौवे, कुत्ते, गाय और बैलों के सम्मान से लेकर भाई-बहन के प्रेम तक को अलग-अलग परंपराओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। इस दौरान घरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। पारंपरिक गीत-संगीत, देउसी-भैलो और पारिवारिक मेल-मिलाप उत्सव की रौनक बढ़ाते हैं।
उत्तराखंड में रहने वाले नेपाली और गोरखा समाज के लिए भी अपनी इन सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश
कुकुर तिहार की सबसे खास बात इसका मानवीय और भावनात्मक संदेश है। यह पर्व याद दिलाता है कि जानवर केवल इंसानों के साथी नहीं, बल्कि हमारे आसपास के जीव-जगत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें भोजन, सुरक्षा, देखभाल और सम्मान देना भी हमारी जिम्मेदारी है।
नेपाल से शुरू हुई इस खूबसूरत परंपरा के जरिए गोरखा और नेपाली संस्कृति की एक ऐसी तस्वीर सामने आती है, जिसमें आस्था के साथ जीवों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता भी जुड़ी हुई है। यही इस पर्व की सबसे बड़ी खूबसूरती है।


