दीपावली पर आतिशबाजी करते समय बरतें सावधानी, पटाखों का धुआं आंखों और सांस के लिए बन सकता है खतरा

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देहरादून। दीपावली का त्योहार रोशनी, उत्साह और खुशियों का प्रतीक है। इस अवसर पर आतिशबाजी और पटाखों की गूंज उत्सव का आनंद बढ़ा देती है, लेकिन थोड़ी सी असावधानी स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और उनमें मौजूद हानिकारक रासायनिक तत्व फेफड़ों, त्वचा और आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में त्योहार का आनंद लेने के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, पटाखों के धुएं में मौजूद प्रदूषक सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। खासतौर पर अस्थमा, एलर्जी और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों को आतिशबाजी वाले स्थानों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। जिला चिकित्सालय कोरोनेशन के फिजीशियन डॉ. प्रवीण पंवार ने सलाह दी है कि सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को पटाखों के धुएं के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। यदि सांस लेने में परेशानी या अन्य असहज लक्षण महसूस हों तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

वहीं, आतिशबाजी का असर आंखों पर भी पड़ सकता है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डॉ. नीरज सारस्वत के अनुसार, पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं और रासायनिक कण आंखों की संवेदनशील सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके कारण आंखों में सूखापन, जलन और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में कॉर्निया पर चोट लगने का खतरा भी रहता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि पटाखे जलाते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और आंखों को धुएं तथा चिंगारियों से बचाएं। बच्चों को आतिशबाजी के दौरान अकेला न छोड़ें। आंखों में कोई परेशानी होने पर उन्हें रगड़ने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है, इसलिए थोड़ी सी सावधानी अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें। रोशनी का पर्व मनाएं, लेकिन सेहत की कीमत पर नहीं।

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