हरिद्वार में सीवरेज नेटवर्क का बड़ा विस्तार, 2028 तक 206 किमी नई लाइन बिछेगी
हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार को स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और जनस्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। वर्ष 2028 तक शहर में कुल 206 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी, जिससे 15 हजार घरेलू कनेक्शनों के माध्यम से करीब 3.50 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा पुनर्जीवन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित की जा रही है और इसका वित्तपोषण केएफडब्ल्यू जर्मन विकास बैंक द्वारा किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा में गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकना, शहर के जलस्रोतों को प्रदूषण से मुक्त करना और हरिद्वार की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके साथ-साथ यह योजना पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और शहरी आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अब तक 150 किलोमीटर क्षेत्र में सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य जारी है और कई इलाकों में काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। शेष 56 किलोमीटर सीवरेज लाइन के लिए निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसे जल्द पूरा कर कार्य शुरू किया जाएगा। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, ताकि शहरवासियों को न्यूनतम असुविधा हो और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद हरिद्वार में सीवेज का वैज्ञानिक ढंग से संग्रह और उपचार संभव होगा। इससे न केवल गंगा नदी में प्रदूषण का स्तर कम होगा, बल्कि भूजल और आसपास के पर्यावरण की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सीवरेज नेटवर्क के विस्तार से जलजनित बीमारियों में कमी आएगी और जनस्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
हरिद्वार एक प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थल है। स्वच्छता और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव में सुधार होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में हरिद्वार को एक स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ शहर के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।कुल मिलाकर, गंगा संरक्षण और शहरी स्वच्छता के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई यह सीवरेज परियोजना हरिद्वार के भविष्य के लिए एक दूरदर्शी और आवश्यक पहल मानी जा रही है।
