एम्स ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की हड़ताल से ओपीडी प्रभावित, पदोन्नति विवाद गहराया
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों का आंदोलन अब हड़ताल तक पहुंच गया है। पदोन्नति से जुड़े विवाद के समाधान की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन का असर अस्पताल की ओपीडी सेवाओं पर पड़ने लगा है। मरीजों को होने वाली असुविधा के बीच एम्स प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए सेवाएं सुचारु रखने का प्रयास कर रहा है।
नर्सिंग अधिकारियों का आंदोलन पिछले 15 दिनों से अधिक समय से जारी है। शुरुआत में धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार के माध्यम से अपनी मांगें उठाने वाले कर्मचारियों ने अब हड़ताल का रास्ता अपना लिया है। आंदोलन के केंद्र में पदोन्नति प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर के अनुपालन को लेकर दो संगठनों के बीच अलग-अलग मांगें हैं।
पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर लागू करने की मांग
एम्स के एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण संघ से जुड़े नर्सिंग कर्मचारियों का आरोप है कि पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर की अनदेखी की गई है। संघ इस व्यवस्था को नियमानुसार लागू करने की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर संगठन के पांच कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका अनशन लगातार जारी है और वे मामले में ठोस निर्णय लिए जाने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, दूसरा संगठन जारी पदोन्नति आदेश को यथावत रखने के पक्ष में आंदोलन कर रहा है। इस संगठन से जुड़े कर्मचारियों ने भी कुछ दिनों तक भूख हड़ताल की थी, लेकिन बाद में आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
समाधान नहीं निकलने पर बढ़ा विरोध
पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद का अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण संघ से जुड़े आंदोलनकारी अपनी मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रखने के पक्ष में हैं। इसी बीच नर्सिंग अधिकारियों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल की नियमित सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।
मरीजों की सुविधा बनाए रखने की चुनौती
ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने के बाद एम्स प्रशासन के सामने मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती है। अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक इंतजाम कर व्यवस्था को संभालने में जुटा है। अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें पदोन्नति विवाद के समाधान और नर्सिंग अधिकारियों की मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।


