उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट, पांच जिलों में मौसम दिखाएगा कड़ा तेवर
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश के पर्वतीय जिलों में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, प्रदेश के शेष जिलों के लिए यलो अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम के इस बदले रुख को देखते हुए शासन ने आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बिजली गिरने, वर्षा और ओलावृष्टि की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा 3200 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होने के आसार हैं। शुक्रवार को जारी पूर्वानुमान में पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में कहीं-कहीं भारी वर्षा की चेतावनी भी दी गई है।
संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी निगरानी, ट्रेकिंग पर नियंत्रण
मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेष रूप से संवेदनशील और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने को कहा है। पर्वतीय इलाकों में मौसम सामान्य होने तक ट्रेकिंग गतिविधियों को नियंत्रित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खराब मौसम और भारी वर्षा के दौरान पर्यटकों की आवाजाही पर नियंत्रण रखने को कहा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके।
सड़कें बंद होने पर तत्काल शुरू होगा रेस्क्यू और बहाली कार्य
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि वर्षा के कारण यदि कहीं सड़कें बाधित होती हैं तो संबंधित विभाग बिना देरी किए मार्ग खोलने की कार्रवाई शुरू करें। जरूरत पड़ने पर संवेदनशील मार्गों पर यातायात को नियंत्रित किया जाए, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पुलिस और एसडीआरएफ को उपकरणों के साथ तैयार रहने के निर्देश
आपदा की स्थिति से निपटने के लिए जिलाधिकारियों को आइआरएस प्रणाली के तहत नामित अधिकारियों और विभागीय नोडल अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखने को कहा गया है। पुलिस, एसडीआरएफ, अग्निशमन और अन्य बचाव दलों को जरूरी उपकरणों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही राजस्व, ग्राम्य विकास और पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने को कहा गया है।
प्रशासन का जोर मौसम की चुनौती के बीच संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।


