15 साल बाद संवरेगा लक्ष्मणझूला-स्वर्गाश्रम का घाट क्षेत्र, 6.29 करोड़ से बदलेगी तस्वीर
ऋषिकेश। गंगा किनारे बसे लक्ष्मणझूला और स्वर्गाश्रम के घाटों पर अब बदहाली का दाग मिटने की उम्मीद जगी है। करीब डेढ़ दशक से मरम्मत और बेहतर सुविधाओं की बाट जोह रहे इन घाटों के जीर्णोद्धार के लिए कुंभ मेला बजट से 6.29 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सिंचाई विभाग दुगड्डा को धनराशि मिलने के बाद अब निर्माण कार्य की तैयारियां तेज हो गई हैं। विभाग के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक माह के भीतर काम शुरू कराने की योजना है।
टूटी सीढ़ियों से गायब रेलिंग तक, लंबे समय से बनी थी परेशानी
लक्ष्मणझूला-स्वर्गाश्रम क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ ही पर्यटन के लिहाज से भी खास पहचान रखता है। यहां सालभर देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। कांवड़ मेला, कुंभ मेला और चारधाम यात्रा के दौरान घाटों पर भीड़ काफी बढ़ जाती है। इसके बावजूद यहां के स्नान घाट लंबे समय से जर्जर हालत में हैं।
कहीं टाइलें उखड़ी हुई हैं तो कहीं सीढ़ियां टूट चुकी हैं। गंगा में स्नान करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए लगाई गईं चेन और रेलिंग भी कई स्थानों पर गायब हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को असुविधा के साथ दुर्घटना का खतरा भी झेलना पड़ता है। क्षेत्र में पहले भी हादसे हो चुके हैं, जिसके बाद घाटों की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही थी।
10 प्रमुख घाटों पर होंगे सुधार कार्य
कुंभ मेला अधिकारियों के निरीक्षण के बाद घाटों के कायाकल्प के लिए बजट स्वीकृत किया गया है। योजना के तहत क्षेत्र के 10 प्रमुख घाटों को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा। इनमें वानप्रस्थ घाट, गीता भवन घाट, साधु समाज घाट, लक्ष्मीनारायण घाट, डालमिया घाट, गंगा दर्शन घाट, वेदनिकेतन घाट, संत सेवा घाट, किरमोला घाट और लक्ष्मण घाट शामिल हैं।
रेड सैंडस्टोन से बदलेगा स्वरूप, सुरक्षा पर भी जोर
जीर्णोद्धार के तहत घाटों पर 40 एमएम मोटे रेड सैंडस्टोन लगाए जाएंगे। इससे घाटों की सतह को बेहतर बनाने के साथ उनके स्वरूप में भी बदलाव आएगा। इसके अलावा क्षतिग्रस्त चेन, पिलर और रेलिंग को बदलने का काम किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नए चेंजिंग रूम बनाए जाएंगे और घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम मजबूत किए जाएंगे।
पर्यटन और श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत
घाटों की मरम्मत होने से स्थानीय लोगों के साथ यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर पर्वों, धार्मिक आयोजनों और यात्रा सीजन के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षित स्नान व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं। यदि तय समय पर काम शुरू होता है, तो लंबे समय से बदहाल पड़े घाटों की तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।


