चुनावी साल में गैरसैंण पर रहेगा सियासत का फोकस, विकास और पहाड़ की आकांक्षाओं के बीच अहम होगा विधानसभा सत्र

खबर शेयर करें -

26 से 28 अक्टूबर तक भराड़ीसैंण में सत्र प्रस्तावित, चुनाव से पहले क्षेत्रीय मुद्दों और विकेंद्रीकृत शासन का संदेश देने की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आने जा रही है। भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में 26 से 28 अक्टूबर तक सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव है। इस सत्र को लेकर भले ही अंतिम निर्णय की प्रक्रिया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्तर पर होनी हो, लेकिन चुनावी वर्ष की दहलीज पर गैरसैंण में सदन की कार्यवाही के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। सरकार के लिए यह सत्र पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, जनभावनाओं और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सामने रखने का अवसर बन सकता है।

गैरसैंण उत्तराखंड की राजनीति में केवल एक स्थान नहीं, बल्कि राज्य आंदोलन की भावनाओं और पहाड़ की पहचान से जुड़ा विषय रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में विकास का संतुलन कायम करने और शासन को दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाने की मांग के बीच यहां विधानसभा सत्र का आयोजन हमेशा चर्चा में रहता है। ऐसे में आगामी सत्र को लेकर भी राजनीतिक और विकासात्मक दोनों दृष्टियों से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।

धामी सरकार के कार्यकाल में छठा सत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मौजूदा कार्यकाल में गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में यह छठा सत्र होगा। इससे पहले वर्ष 2023 में यहां बजट सत्र आयोजित किया गया था। वर्ष 2024 में मानसून सत्र, जबकि वर्ष 2025 में बजट और मानसून सत्र आयोजित हुए। इसके बाद इस वर्ष भी भराड़ीसैंण में बजट सत्र संपन्न हो चुका है।

लगातार सत्र आयोजित किए जाने को गैरसैंण में विधायी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की प्राथमिकताओं में गैरसैंण को बनाए रखने के साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि यहां होने वाली चर्चाओं का लाभ पर्वतीय क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं के समाधान तक किस हद तक पहुंचता है।

पहाड़ के मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद

आगामी विधानसभा सत्र में पर्वतीय क्षेत्रों की बुनियादी जरूरतों और विकास से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं। पलायन रोकने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सड़क संपर्क का विस्तार करने जैसे विषय पहाड़ की लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों में शामिल हैं।

दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय आबादी को अपने ही क्षेत्र में आजीविका के अवसर देना सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में गैरसैंण में सदन की बैठक से इन विषयों पर चर्चा को नई दिशा मिलने की उम्मीद रहेगी। हालांकि, इन चर्चाओं का वास्तविक महत्व इस बात से तय होगा कि संबंधित मुद्दों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

चुनावी कसौटी पर सरकार की प्राथमिकताएं

अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने के कारण इस बार गैरसैंण सत्र का महत्व सामान्य विधायी कार्यवाही से आगे बढ़ सकता है। चुनाव से पहले सरकार के सामने विकास योजनाओं को गति देने, क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती है। गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित कर सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के प्रति अपनी प्राथमिकता और विकेंद्रीकृत शासन की अवधारणा को भी रेखांकित कर सकती है।

हालांकि, पहाड़ की जनता के लिए केवल सत्र का आयोजन ही पर्याप्त नहीं होगा। रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में ठोस प्रगति ही सरकार के प्रयासों की प्रभावशीलता का वास्तविक पैमाना बनेगी। ऐसे में 26 से 28 अक्टूबर तक प्रस्तावित गैरसैंण सत्र पर राजनीतिक दलों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों की जनता की निगाहें भी टिकी रहेंगी।

Ad