भारत माता मंदिर में श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह का दूसरा दिन धर्मसभा से शुरू
हरिद्वार: हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि महाराज की समाधि स्थली पर आयोजित श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह के दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत भव्य धर्मसभा और संत सम्मेलन के साथ हुई। श्रद्धा, साधना और राष्ट्रचिंतन से ओतप्रोत इस आयोजन में देशभर से पधारे प्रमुख संतों, धर्माचार्यों और विद्वान मनीषियों ने गुरुदेव के जीवन-दर्शन, सनातन धर्म की प्रासंगिकता तथा राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे।
धर्मसभा में वक्ताओं ने कहा कि स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि महाराज का जीवन त्याग, तप और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण रहा है। उन्होंने भारत माता मंदिर की स्थापना के माध्यम से देशवासियों में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया। संतों ने कहा कि आज के भौतिकतावादी युग में गुरुदेव के विचार समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि महाराज ने सनातन संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने का कार्य किया। उनका जीवन राष्ट्र, धर्म और समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों से युक्त समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकता है।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है और स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि महाराज जैसे संतों ने इस परंपरा को जीवंत बनाए रखा। उन्होंने कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज में नैतिकता, सहिष्णुता और सद्भाव को मजबूत करता है।
धर्मसभा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों का क्रम भी चलता रहा। संत सम्मेलन में वक्ताओं ने सनातन धर्म के सार्वभौमिक संदेश, वसुधैव कुटुम्बकम की भावना और राष्ट्र निर्माण में सांस्कृतिक चेतना की भूमिका पर प्रकाश डाला।
आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही। श्रद्धालुओं ने समाधि स्थल पर दर्शन कर गुरुदेव के चरणों में श्रद्धा अर्पित की। सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, वहीं आयोजन समिति द्वारा अतिथियों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं।
समारोह के आगामी सत्रों में भी धर्म, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए संत-महात्मा और विद्वान अपने विचार साझा करेंगे।
