सरकारी अस्पतालों में ट्रेनिंग का मौका, निजी नर्सिंग कॉलेजों को एक साल का अल्टीमेटम

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देहरादून। उत्तराखंड में निजी नर्सिंग और एलाइड हेल्थकेयर संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण का रास्ता आसान होने जा रहा है। सरकार ने फिलहाल इन संस्थानों के छात्रों को नजदीकी राजकीय अस्पतालों से जोड़कर क्लीनिकल ट्रेनिंग उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। हालांकि, यह सुविधा स्थायी नहीं रहेगी। सभी संबंधित संस्थानों को अगले एक वर्ष के भीतर अपने स्तर पर अस्पताल या जरूरी प्रशिक्षण संसाधन विकसित करने होंगे।

शुक्रवार को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। बैठक में सामने आया कि निजी नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को व्यावहारिक और नैदानिक अनुभव देने के लिए पर्याप्त अस्पताल सुविधाओं की जरूरत है। इसी को देखते हुए उन्हें सरकारी अस्पतालों से संबद्ध करने की व्यवस्था तैयार करने पर सहमति बनी।

निकटतम सरकारी अस्पतालों में मिलेगी प्रशिक्षण की सुविधा

निर्णय के अनुसार, संबंधित संस्थानों और विश्वविद्यालयों के आसपास स्थित राजकीय अस्पतालों को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चिह्नित किया जाएगा। इसके लिए विभागाध्यक्ष, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में प्रशिक्षण मिलने से विद्यार्थियों को मरीजों की देखभाल, उपचार की प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक कार्यों को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा।

एक साल बाद संस्थानों को खुद करनी होगी व्यवस्था

सरकार ने साफ किया है कि सरकारी अस्पतालों से मिलने वाली यह सुविधा केवल अस्थायी समाधान है। नर्सिंग और एलाइड हेल्थकेयर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले सभी निजी संस्थानों को एक वर्ष के भीतर अपने अस्पताल अथवा निर्धारित प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करनी होंगी। यानी तय समयसीमा पूरी होने के बाद संस्थानों को विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी व्यवस्था तैयार करनी होगी।

बैठक में विभागीय सचिव विनय शंकर पांडेय, महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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