जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तार को रफ्तार, योगेश मेहरा बने विशेष मजिस्ट्रेट
देहरादून : देहरादून जिला प्रशासन ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को गति देने की दिशा में एक अहम और निर्णायक कदम उठाया है। लंबे समय से लंबित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ऋषिकेश के उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा को विशेष मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। उन्हें भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की समूची प्रक्रिया को प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विशेष मजिस्ट्रेट की नियुक्ति से अब परियोजना से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है। भूमि अधिग्रहण को लेकर उत्पन्न होने वाली कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं के समाधान के साथ-साथ मुआवजा वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, जिन परिवारों और किसानों की भूमि इस परियोजना में अधिग्रहित की जानी है, उनके पुनर्वास और आजीविका से जुड़े मामलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा।
गौरतलब है कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तार परियोजना उत्तराखंड के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में बढ़ते हवाई यात्री दबाव और पर्यटन सीजन के दौरान बढ़ती आवाजाही को देखते हुए एयरपोर्ट विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। परियोजना के पूरा होने से बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी, जिससे प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा।

प्रशासन का मानना है कि एयरपोर्ट विस्तार से न केवल राज्य में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा, बल्कि निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। खासकर चारधाम यात्रा, साहसिक पर्यटन और वेलनेस टूरिज्म को इससे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परियोजना के तहत प्रभावित लोगों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मुआवजा वितरण में सरकारी मानकों का पालन करते हुए समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, वहीं पुनर्वास के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विशेष मजिस्ट्रेट की नियुक्ति के बाद अब परियोजना से जुड़े लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण होगा और जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तार का कार्य निर्धारित समय-सीमा में आगे बढ़ सकेगा। इससे उत्तराखंड के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
