आजादी के बाद उपलब्धियां कुछ परिवारों तक सीमित रहीं, अब गरीब केंद्र में प्रधानमंत्री
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आज़ादी के बाद लंबे समय तक देश की हर बड़ी उपलब्धि और सरकारी योजनाओं का श्रेय कुछ गिने-चुने परिवारों तक ही सीमित रहा। आम नागरिक, विशेषकर गरीब, वंचित और पिछड़े वर्ग के लोग विकास की मुख्यधारा से दूर रखे गए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस व्यवस्था को बदलते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत को शासन का आधार बनाया है, ताकि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के विकास का लाभ पहुंचे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशकों में परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति ने देश को कमजोर किया। कुछ परिवारों के हितों के लिए नीतियां बनाई गईं, जबकि करोड़ों गरीब बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। उनकी सरकार ने इस सोच को समाप्त कर सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ काम किया है।

उन्होंने कहा कि आज सरकारी योजनाएं किसी जाति, वर्ग, क्षेत्र या राजनीतिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरत के आधार पर लागू की जा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इनका लाभ सीधे गरीबों तक पहुंच रहा है, वह भी बिना किसी भेदभाव और सिफारिश के।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले तुष्टीकरण की राजनीति के कारण समाज में विभाजन बढ़ा, लेकिन उनकी सरकार ने संतुष्टीकरण की नीति अपनाई है, जिसमें हर नागरिक की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र सशक्त बनता है।
उन्होंने आगे कहा कि अंत्योदय का अर्थ केवल नारा नहीं, बल्कि शासन की आत्मा है। जब गरीब का जीवन आसान होता है, जब उसे पक्का घर, शौचालय, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधा और सम्मान मिलता है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि देश अब परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति से आगे बढ़कर सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन देश की जनता के विश्वास और सहयोग से संभव हुआ है और आने वाले समय में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा।
