अंकिता मामले में न्याय की मांग पर भगत राम कोठारी का इस्तीफा

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देहरादून : राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ उस वक्त आया, जब पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कोठारी ने भावुक शब्दों में अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि अंकिता सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि हमारी बेटी है। उसके साथ जो हुआ, वह पूरे राज्य में महिलाओं की असुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। कोठारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने शुरू से ही अंकिता मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की। इस मुद्दे को उन्होंने पार्टी के भीतर भी लगातार उठाया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने न्याय की बजाय राजनीतिक सुविधा और दबावों को प्राथमिकता दी, जिससे वह आहत हुए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता। “जब बात किसी बेटी की हो, तो राजनीति पीछे रहनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ,” यह कहते हुए कोठारी भावुक हो उठे। कोठारी ने आगे कहा कि उन्होंने काफी समय तक पार्टी के भीतर रहकर न्याय की लड़ाई लड़ने की कोशिश की, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है, तब उन्होंने भारी मन से पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन फैसला बताया।

इस इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने कोठारी के बयान को सरकार और सत्ताधारी दल की नीतियों पर करारा हमला बताया है, वहीं महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उनके कदम का समर्थन करते हुए अंकिता मामले में शीघ्र और निष्पक्ष न्याय की मांग दोहराई है।

अंकिता प्रकरण अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन चुका है। कोठारी का इस्तीफा और उनका बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर और तेज़ होने वाला है।

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