मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व सीएम हरीश रावत से की शिष्टाचार भेंट

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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आपसी सौहार्द और शिष्टाचार का एक सकारात्मक संदेश देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत से उनके देहरादून स्थित डिफेंस कॉलोनी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हरीश रावत का कुशलक्षेम जाना और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

भेंट का यह अवसर औपचारिक राजनीतिक मुलाकात से आगे बढ़कर आत्मीयता का प्रतीक बन गया, जब मुख्यमंत्री धामी अपने खेत में उत्पादित चावल अपने साथ लेकर पहुंचे और उन्हें हरीश रावत को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तराखंड की समृद्ध कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय उत्पादों के सम्मान का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी मिट्टी, उसके खेतों और किसानों की मेहनत से है। उन्होंने कहा कि अपने खेत का अन्न भेंट करना केवल एक औपचारिक उपहार नहीं, बल्कि राज्य की जड़ों से जुड़े रहने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश भी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सम्मान और सद्भाव लोकतांत्रिक परंपराओं की ताकत है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस आत्मीय भेंट के लिए मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात राजनीतिक शुचिता और आपसी सम्मान का सुंदर उदाहरण है। रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अपने खेत का चावल भेंट करना अत्यंत भावुक और अर्थपूर्ण gesture है, जो उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ संवाद और पारस्परिक सम्मान ही राजनीतिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। इस प्रकार की मुलाकातें समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं और यह बताती हैं कि राजनीति केवल विरोध का नहीं, बल्कि सहयोग और शिष्टाचार का भी माध्यम हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात उत्तराखंड की राजनीति में सौहार्दपूर्ण वातावरण का संकेत देती है। अक्सर तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच इस तरह की आत्मीय भेंटें जनता के बीच विश्वास और परिपक्वता का संदेश देती हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों और मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा अपने खेत का चावल भेंट करना ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी मजबूती देता है।

इस शिष्टाचार भेंट ने यह स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक परंपराओं में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और सद्भाव की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, और यही स्वस्थ राजनीति की पहचान भी है।

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