हरिद्वार में संत सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
हरिद्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित सप्तऋषि आश्रम मैदान ,भारत माता मंदिर के समीप, सप्त सरोवर मार्ग में आयोजित भव्य ‘संत सम्मेलन’ में प्रतिभाग किया। गंगा तट पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से आए संत-महात्मा, धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत समाज को सनातन चेतना का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि माँ गंगा के पावन तट पर सप्तऋषि क्षेत्र में एकत्र होकर संत-महात्मा राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण के लिए अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन महापुरुषों ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रधर्म, सेवा, त्याग और करुणा के लिए समर्पित किया, वे केवल संन्यासी नहीं थे, बल्कि राष्ट्र चेतना से जुड़े दिव्य संत थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान को सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए ऐसा जीवन दर्शन प्रस्तुत किया, जिससे अनगिनत लोगों को मानवता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। भारत माता मंदिर की स्थापना कर उन्होंने सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का कार्य किया, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है। वर्ष 1998 के कुंभ मेले में उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त हुई, जिसके पश्चात अब तक 10 लाख से अधिक नागा साधुओं को दीक्षा प्रदान की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की मूर्ति स्थापना नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगी। संत परंपरा किसी एक पंथ या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भाव से सम्पूर्ण विश्व को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म मानव निर्मित नहीं, बल्कि शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है, जो समय के साथ चलता है और कभी पराजित नहीं होता।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त दंगा रोधी कानून लागू किए हैं तथा लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी जिहादी मानसिकताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था की गई है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके सकारात्मक परिणामस्वरूप 28 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियाँ मिली हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक उत्थान का नया युग प्रारंभ हुआ है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण और बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान जैसे कार्य भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित भारत माता मंदिर देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 के कुंभ मेले की तैयारियाँ प्रारंभ कर दी गई हैं और स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज का जीवन निरंतर सत्कर्म और साधना से प्रेरणा देता है।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत में बीते वर्षों में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है और आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल, थल और वायु मार्गों का तीव्र विकास हुआ है तथा युवा शक्ति देश को विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर कर रही है। संत समाज भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करने और देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।
बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संतों का सान्निध्य जीवन के दुखों का समाधान है। भारत की पहचान सनातन संस्कृति से है। शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ देश की आध्यात्मिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक है और उसकी अभिव्यक्ति विभिन्न आस्थाओं के माध्यम से होती है। संत सम्मेलन में शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज, योग गुरु बाबा रामदेव सहित अनेक प्रमुख संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक चेतना के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ।
