पांच साल में 5.8 गुना बढ़ा धामी सरकार का अनुपूरक बजट, विकास कार्यों पर बढ़ा फोकस
देहरादून। उत्तराखंड में चुनावी वर्ष से पहले धामी सरकार के अनुपूरक बजट का आकार पांच साल में करीब 5.8 गुना बढ़ गया है। दिसंबर 2021 में पेश किए गए 1,353.80 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट की तुलना में अक्टूबर 2026 का बजट बढ़कर 7,844.18 करोड़ रुपये हो गया है। बजट में हुई यह बढ़ोतरी केवल वित्तीय विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को भी दर्शाती है।
वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना अनुपूरक बजट पेश किया था। अब पांच साल बाद एक बार फिर चुनाव से पहले अनुपूरक बजट के जरिए सरकार ने विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
विकास परियोजनाओं के लिए बढ़ा बजट का हिस्सा
धामी सरकार के अनुपूरक बजट में सबसे बड़ा बदलाव पूंजीगत व्यय के मोर्चे पर दिखाई देता है। दिसंबर 2021 में पूंजीगत मद के लिए 184.88 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जो कुल बजट का लगभग 13.7 प्रतिशत था। अक्टूबर 2026 में यह राशि बढ़कर 4,164.32 करोड़ रुपये पहुंच गई है। अब कुल अनुपूरक बजट में पूंजीगत मद की हिस्सेदारी करीब 53.1 प्रतिशत हो गई है।
पांच वर्षों के भीतर पूंजीगत मद में लगभग 22.5 गुना की वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार ने सड़क, आधारभूत ढांचे और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों को अधिक महत्व दिया है।
2021 में आपदा राहत और सड़कें थीं प्राथमिकता
दिसंबर 2021 में पेश किए गए अनुपूरक बजट का बड़ा हिस्सा आपदा राहत और पहले से संचालित योजनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए रखा गया था। उस समय आपदा राहत के लिए 668.36 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग को 150 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास विभाग को 104.67 करोड़ रुपये, सूचना विभाग को 104 करोड़ रुपये और नंदा गौरा योजना के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। उस दौर के बजट में आपदा से निपटने, सड़कों की मरम्मत और विभिन्न सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिखाई दिया था।
कुंभ-2027 से शिक्षा और स्वास्थ्य तक बढ़ा दायरा
अक्टूबर 2026 के अनुपूरक बजट में सरकार की प्राथमिकताओं का दायरा पहले के मुकाबले व्यापक नजर आता है। इसमें कुंभ-2027 की तैयारियों, गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना और अवस्थापना विकास के लिए प्रावधान किए गए हैं। स्थानीय निकायों को भी अतिरिक्त बजटीय सहायता देने की व्यवस्था की गई है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों को भी बजट में जगह मिली है। आयुष्मान योजना, पेंशन, डिजिटल लर्निंग, मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों और खेल विश्वविद्यालय के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।
बजट के आंकड़े बता रहे प्राथमिकताओं में बदलाव
दोनों अनुपूरक बजटों की तुलना से पता चलता है कि पांच साल पहले जहां आपदा राहत, सड़क मरम्मत और मौजूदा योजनाओं की जरूरतों पर अधिक जोर था, वहीं अब बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को भी अतिरिक्त संसाधन दिए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट आकार और आवंटन के लिहाज से वर्ष 2021 के बजट से काफी बड़ा है। अब इन प्रावधानों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग धनराशि का उपयोग कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से करते हैं तथा विकास योजनाओं का लाभ आम लोगों तक किस हद तक पहुंचता है।


