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ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का पावन आगमन सनातन चेतना, सेवा-भाव और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा का अद्भुत संगम बनकर उभरा। इस अवसर पर परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने शंखध्वनि, वेदमंत्रोच्चार और पुष्पवर्षा के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया, जिससे समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं आचार्य श्री के मध्य हुई दिव्य भेंटवार्ता में सनातन धर्म की जीवंतता, युवाओं को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने, राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने तथा सेवा को साधना का रूप देने जैसे विषयों पर गहन और सार्थक विचार-विमर्श हुआ। दोनों संतों ने धर्म, सेवा और संस्कृति के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।

इस पावन अवसर पर वेदमंत्रों के साथ माँ गंगा का पूजन किया गया, जिसने श्रद्धा, साधना और सेवा के अनुपम दृश्य को साकार किया। गंगातट पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण के साक्षी बनकर आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान श्रीराम लला प्रतिष्ठा–2026 के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी गईं। साथ ही आगामी सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का पावन निमंत्रण भी प्रदान किया गया, जिसे स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सनातन संस्कृति की करुणा, सामाजिक समरसता और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण बताया।

आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा संचालित बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल एवं मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रगति की जानकारी लेते हुए स्वामी जी ने इसे बुन्देलखंड के लिए “सबसे बड़ा उपहार” बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान भविष्य में लाखों जरूरतमंदों के लिए आशा की किरण बनेगा और आध्यात्मिकता के साथ स्वास्थ्य सेवा का यह संगम सच्चे अर्थों में राष्ट्रनिर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण “जय श्रीराम”, “हर हर गंगे” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक उल्लास और राष्ट्रीय चेतना से भर दिया।

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