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ऋषिकेश : एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में एक होनहार छात्र की सफलता ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। एमडी मेडिसिन के विद्यार्थी डॉ. देबांग अग्रवाल को एक साथ सात गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। इस असाधारण उपलब्धि पर उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें इतनी बड़ी उपलब्धि की उम्मीद नहीं थी और यह उनके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित रहा।

वर्ष 2001 में जयपुर, राजस्थान में जन्मे डॉ. देबांग अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने हमेशा कड़ी मेहनत पर विश्वास किया। उन्हें इस बात का भरोसा था कि उनकी मेहनत रंग लाएगी और वे गोल्ड मेडल जरूर हासिल करेंगे, लेकिन एक साथ सात स्वर्ण पदक मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

उन्होंने अपने बचपन की एक प्रेरणादायक कहानी साझा करते हुए बताया कि बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देख लिया था। उनकी कॉलोनी में एक डॉक्टर, जिनका नाम भी देबांग था, लोगों की सेवा किया करते थे। उनके कार्य और समर्पण को देखकर वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भी उसी राह पर चलने का संकल्प लिया। आज वही सपना साकार हो चुका है।

डॉ. देबांग अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं और उनका लक्ष्य चिकित्सा के क्षेत्र में रहकर मरीजों की सेवा करना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, शिक्षकों और निरंतर प्रयास को दिया।एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा। इनमें प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल, फर्स्ट पोजिशन सहित अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल, प्रो. अनिल गुलाटी गोल्ड मेडल, प्रो. रविकांत गोल्ड मेडल और प्रो. शशि प्रतीक गोल्ड मेडल शामिल हैं।

अपने संदेश में डॉ. देबांग ने युवाओं से कहा कि वे निरंतर मेहनत करते रहें और अपने कार्य के प्रति समर्पित रहें। उनका मानना है कि सेवा भाव और लगन से किया गया कार्य ही असली सफलता दिलाता है।

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