गांधीनगर में पेयजल संकट गहराया, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
हल्द्वानी /नैनीताल : हल्द्वानी शहर के गांधीनगर क्षेत्र में पिछले करीब दो महीनों से गंदे और दूषित पानी की आपूर्ति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। क्षेत्र के कई परिवारों का कहना है कि नलों से आ रहा पानी पीने योग्य नहीं है, जिससे खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। दूषित पानी पीने से कई बच्चे बीमार पड़ चुके हैं, जिनमें मात्र 14 महीने की एक बच्ची भी शामिल है, जिसका इलाज निजी चिकित्सालय में कराया गया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, नलों से आने वाले पानी में बदबू, गंदगी और कभी-कभी पीला रंग दिखाई देता है। मजबूरी में लोगों को या तो महंगा बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर दूर-दराज स्थित नलकूपों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी पर अतिरिक्त आर्थिक और शारीरिक बोझ पड़ रहा है।क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि बच्चों को नहलाने और खाना बनाने में भी उन्हें डर लग रहा है। कई घरों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार की शिकायतें सामने आई हैं। अभिभावकों का आरोप है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कोई बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर, जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अधिकारियों का दावा है कि यदि शिकायत दर्ज कराई जाती है तो पानी की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, यह बयान जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। स्थानीय पार्षद ने क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पार्षद के अनुसार, संबंधित विभाग को कई बार मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो जनआंदोलन किया जाएगा।

फिलहाल गांधीनगर के लोग साफ पानी की आस में प्रशासन और जल संस्थान की ओर देख रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि पानी की आपूर्ति लाइन की तत्काल जांच की जाए, टंकियों की सफाई हो और नियमित रूप से पानी के सैंपल लेकर गुणवत्ता की जांच की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की सेहत खतरे में न पड़े।
