बद्रीनाथ धाम में तप्त कुंड के जल स्रोत पर वैज्ञानिक शोध शुरू, आईआईआरएस की टीम पहुंची चमोली
चमोली: प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल बाबा बद्रीनाथ धाम में स्थित तप्त कुंड के प्राकृतिक जल स्रोतों पर वैज्ञानिक शोध का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान के वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम बद्रीनाथ धाम पहुंच चुकी है, जो तप्त कुंड के गर्म पानी के मूल स्रोत, उसकी गहराई और भू-गर्भीय संरचना का विस्तृत अध्ययन करेगी।
वैज्ञानिकों की यह टीम मंदिर परिसर और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जमीन की वास्तविक परिस्थितियों का अवलोकन करेगी। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि तप्त कुंड का गर्म पानी किस गहराई से और किन भू-गर्भीय परतों से निकलकर सतह तक पहुंचता है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि बद्रीनाथ क्षेत्र में चल रही विकास परियोजनाओं का इन प्राकृतिक जल स्रोतों पर कोई प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है।
गौरतलब है कि बद्रीनाथ धाम में स्थित तप्त कुंड का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्व है। मान्यता है कि इस कुंड का जल औषधीय गुणों से भरपूर है और श्रद्धालु दर्शन से पहले इसी कुंड में स्नान करते हैं। वर्षों से यह प्रश्न बना हुआ था कि इतने ठंडे हिमालयी क्षेत्र में तप्त कुंड का जल स्वाभाविक रूप से गर्म कैसे रहता है। अब इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए वैज्ञानिक स्तर पर गहन शोध किया जा रहा है।
बीते अक्टूबर माह में अलकनंदा नदी के तट पर बद्रीनाथ महायोजना के तहत चल रहे रिवर फ्रंट विकास कार्यों को एहतियातन रोक दिया गया था। आशंका जताई जा रही थी कि निर्माण गतिविधियों से तप्त कुंड और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब वैज्ञानिक अध्ययन शुरू होने के साथ ही इन कार्यों की समीक्षा भी दोबारा की जा रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शोध रिपोर्ट के आधार पर ही आगे रिवर फ्रंट और अन्य विकास कार्यों को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि बद्रीनाथ धाम के धार्मिक महत्व, पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों ने भी इस वैज्ञानिक अध्ययन का स्वागत किया है। उनका कहना है कि तप्त कुंड बद्रीनाथ धाम की आत्मा है और इसके संरक्षण के लिए ठोस वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिया जाना बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में इस शोध से तप्त कुंड से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों के सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
