उत्तराखंड में मौसम की बेरुखी का असर: बर्फबारी न होने से पक्षियों का माइग्रेशन चक्र गड़बड़ाया

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देहरादून : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जनवरी के दूसरे पखवाड़े तक भी वर्षा और बर्फबारी न होने से प्राकृतिक संतुलन पर गहरा असर पड़ने लगा है। मौसम के इस असामान्य व्यवहार का सीधा प्रभाव पक्षियों के माइग्रेशन चक्र पर दिखाई दे रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों से हर वर्ष सर्दियों में निचले इलाकों की ओर आने वाले कई प्रवासी पक्षी इस बार नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे पक्षी प्रेमियों, वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।आमतौर पर दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी ठंड, हिमपात और भोजन की कमी के कारण पक्षी सुरक्षित और अपेक्षाकृत गर्म निचले इलाकों की ओर पलायन करते हैं। लेकिन इस वर्ष बर्फबारी न होने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों का तापमान अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ है, जिसके चलते प्रवासी पक्षियों का यह स्वाभाविक चक्र बाधित हो गया है।

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, नमी की भारी कमी के कारण जंगलों, घास के मैदानों और जलस्रोतों में कीट-पतंगों तथा बीजों की उपलब्धता कम हो गई है। यही कारण है कि कई पक्षी भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। कुछ प्रजातियां अपने पारंपरिक प्रवास मार्ग छोड़कर नए इलाकों की ओर जा रही हैं, जबकि कई पक्षी ऐसे स्थानों पर रुक गए हैं, जहां वे सामान्य परिस्थितियों में नहीं पाए जाते थे।

नैनीताल, चकराता, औली, मुनस्यारी और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में सक्रिय पक्षी प्रेमियों का कहना है कि इस साल हिमालयी मोनाल, स्नो पिजन, रेड-बिल्ड चफ और कुछ जलपक्षियों की संख्या में साफ कमी देखी जा रही है। वहीं, झीलों और जलाशयों में दिखने वाले प्रवासी जलपक्षी भी अपेक्षित संख्या में नहीं पहुंचे हैं। वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञ इस स्थिति को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि बदलते मौसम के पैटर्न, अनियमित वर्षा और लगातार बढ़ते तापमान का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों और पक्षियों के जीवन चक्र पर भी पड़ रहा है। यदि आने वाले वर्षों में यही स्थिति बनी रही, तो कई पक्षी प्रजातियों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले सर्दियों में बर्फबारी और बारिश से जंगलों में नमी बनी रहती थी, जिससे पक्षियों के लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आश्रय मिलता था। अब सूखे हालात के कारण जंगलों की जैव विविधता भी प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों ने सरकार और वन विभाग से पक्षियों के माइग्रेशन पैटर्न पर वैज्ञानिक अध्ययन कराने, जलस्रोतों के संरक्षण और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था करें, ताकि इस असामान्य मौसम में उन्हें कुछ राहत मिल सके।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और वर्षा का अभाव केवल मौसम की चिंता नहीं, बल्कि आने वाले समय में पर्यावरणीय असंतुलन का गंभीर संकेत भी है, जिसकी अनदेखी भारी पड़ सकती है।

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