बीजेपी की नई टीम से दुष्यंत गौतम बाहर, उत्तराखंड में उठे अंकिता कांड से जुड़े सवाल
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को जगह नहीं मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को अंकिता भंडारी प्रकरण से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, बीजेपी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है कि गौतम को राष्ट्रीय टीम में जगह न मिलने का संबंध इस प्रकरण से है।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में 8 राष्ट्रीय महामंत्री और 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शामिल किए गए हैं। नई टीम में कई पुराने चेहरों को हटाकर नए नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसी फेरबदल में दुष्यंत गौतम का नाम राष्ट्रीय महामंत्रियों की सूची में नहीं है। गौतम उत्तराखंड के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
अंकिता प्रकरण से क्यों जुड़ रहा है नाम?
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े घटनाक्रम में दुष्यंत गौतम का नाम पिछले कुछ समय में सार्वजनिक विवाद का हिस्सा रहा है। जून 2026 में पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी भी इसी राजनीतिक विवाद से जुड़े आरोपों के संदर्भ में हुई थी। पुलिस के मुताबिक राठौर पर दुष्यंत गौतम को अंकिता हत्याकांड से जोड़ने की कथित साजिश से संबंधित आरोप थे।
मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुरेश राठौर से जुड़े चार एफआईआर में से दो को रद्द किया, जबकि दुष्यंत गौतम की शिकायत समेत दो मामलों में एफआईआर को बरकरार रखा। अदालत के आदेश में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किसी व्यक्ति की छवि को गंभीर अपराध से जोड़ने के आरोपों को गंभीरता से लिया गया।
क्या बीजेपी विवादित सियासी मुद्दों से दूरी बना रही है?
यहीं से उत्तराखंड की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। क्या बीजेपी चुनावी साल में ऐसे विवादों से जुड़े राजनीतिक चेहरों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है?
2027 का विधानसभा चुनाव सामने है और अंकिता भंडारी का मामला उत्तराखंड में बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा बन चुका है। ऐसे में बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में हुए फेरबदल को विपक्ष अपने राजनीतिक नजरिए से देख सकता है। लेकिन यह कहना कि दुष्यंत गौतम को पद से हटाने का कारण अंकिता भंडारी प्रकरण ही है, फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुष्ट नहीं है।
अंकिता केस में कानूनी स्थिति क्या है?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में निचली अदालत तीनों दोषियों —–+पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। अगस्त 2026 में नैनीताल हाईकोर्ट ने तीनों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
हालांकि, अंकिता प्रकरण से जुड़े कथित VIP एंगल और अन्य सवाल आज भी राजनीतिक बहस में बने हुए हैं। यही वजह है कि अंकिता भंडारी का नाम उत्तराखंड की राजनीति में समय-समय पर फिर उभर आता है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का किसी विवाद या मुकदमे में नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। आरोप, जांच, अदालत की कार्यवाही और दोषसिद्धि ये सभी अलग-अलग कानूनी चरण हैं।
2027 में कितना बड़ा मुद्दा बनेगा अंकिता कांड?
दुष्यंत गौतम की नई राष्ट्रीय टीम से गैरमौजूदगी और सुरेश राठौर प्रकरण ने अंकिता भंडारी मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाता है और बीजेपी इस पर क्या राजनीतिक रणनीति अपनाती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुष्यंत गौतम को राष्ट्रीय टीम से बाहर करना महज संगठनात्मक बदलाव है, या चुनावी साल में विवादों से दूरी बनाने की कोई बड़ी रणनीति?
इसका जवाब बीजेपी की ओर से आने वाले आधिकारिक बयानों और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही साफ होगा।
