राजाजी टाइगर रिजर्व में एलिवेटेड कॉरिडोर बना वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग

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उत्तराखंड : दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण जहां एक ओर यातायात को तेज और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं इसका एक अहम हिस्सा—राजाजी टाइगर रिजर्व में बना एलिवेटेड कॉरिडोर , वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। यह कॉरिडोर न केवल आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का भी बेहतरीन नमूना पेश करता है।

राजाजी टाइगर रिजर्व, जो हाथियों, बाघों, तेंदुओं और अन्य कई दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है, लंबे समय से सड़क और रेल यातायात के कारण वन्यजीवों के लिए जोखिम भरा क्षेत्र बना हुआ था। अक्सर जानवरों के सड़क पार करने के दौरान दुर्घटनाएं होती थीं, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता था। इस समस्या के समाधान के रूप में एक्सप्रेसवे के इस हिस्से को एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है, ताकि नीचे से वन्यजीव बिना किसी बाधा के अपने प्राकृतिक मार्गों का उपयोग कर सकें।

करीब 12 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को न्यूनतम नुकसान पहुंचाए। इसके निर्माण में विशेष ध्यान रखा गया है कि वन्यजीवों की आवाजाही बाधित न हो और उनके प्राकृतिक व्यवहार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके साथ ही, कॉरिडोर के नीचे हरियाली और प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखने के प्रयास भी किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं भविष्य में विकास कार्यों के लिए एक मॉडल बन सकती हैं, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाती है। इससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आती है।

सरकार और वन विभाग के अधिकारी भी इस परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह एलिवेटेड कॉरिडोर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करता है और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में मददगार साबित होगा। साथ ही, इससे पर्यटकों और यात्रियों को भी एक अनोखा अनुभव मिलेगा, जहां वे प्रकृति के बीच से गुजरते हुए भी उसे नुकसान पहुंचाए बिना यात्रा कर सकेंगे।

कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर राजाजी टाइगर रिजर्व में बना यह एलिवेटेड कॉरिडोर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में देशभर में इस तरह की परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बनेगा।

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