जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में बाढ़ सुरक्षा, रिवर ड्रेसिंग और स्वच्छता पर जोर

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देहरादून: अस्थायी राजधानी देहरादून में एक बार फिर जिला गंगा संरक्षण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, बाढ़ सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यटन विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने की।

बैठक में समिति के नामित सदस्य एवं पर्यावरणविद विनोद प्रसाद जुगलान ने सौंग़ नदी में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त सुरक्षा तटबंध के शीघ्र निर्माण की मांग उठाई। इसके साथ ही उन्होंने रिवरफ्रंट विकास के तहत गंगा कैचमेंट एरिया में रिवर ड्रेसिंग का कार्य कराए जाने का आग्रह किया। इस पर सीडीओ अभिनव शाह ने बताया कि संबंधित विभागों द्वारा इस संबंध में आख्या तैयार कर शासन को रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई है।

पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने लक्कड़ घाट के समीप प्रस्तावित सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण से पहले गंगा तटीय क्षेत्र में लगभग 15 हेक्टेयर प्लांटेशन के निकट सुरक्षा तटबंध बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे परियोजना के तहत भविष्य में होने वाले निर्माण कार्य बाढ़ आपदा से प्रभावित न हों, इसके लिए पूर्व नियोजन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अक्सर बड़ी दुर्घटना के बाद ही हम जागते हैं, जबकि बीते वर्ष जोशीमठ में नमामि गंगे योजना के तहत हुए नुकसान से हमें सबक लेना चाहिए था।मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ देहरादून ने उत्तराखंड पेयजल निगम अनुरक्षण एवं निर्माण इकाई के प्रबंधक एस.के. वर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैठक में खदरी क्षेत्र में स्थित अमृत सरोवर में प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत द्वारा संचालित नौकायन व्यवस्था के लिए जेट्टी फ्लोटिंग डॉक्स उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया। इस पर जिला पर्यटन विभाग को आवश्यक निर्देश जारी करने के आदेश दिए गए।लक्कड़ घाट के निकट बायो कंजर्वेटरी पार्क की स्थापना के सुझाव पर अब तक क्रियान्वयन न होने का मुद्दा उठने पर प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार शर्मा ने संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

समिति की नामित सदस्य प्रतिभा सरण ने यात्रा सीजन शुरू होने से पहले सत्यनारायण मंदिर, नेपाली फार्म और एम्स के निकट शौचालय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने बताया कि इन क्षेत्रों में अंतर्राज्यीय परिवहन बसों का बड़े पैमाने पर संचालन होता है, लेकिन शौचालय सुविधा के लिए संबंधित विभागों द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र न दिए जाने से आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इस पर संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने संबंधित विभागों की अलग से बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

बैठक में गत माह हुई बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की गई। साथ ही ऋषिकेश में गंगा नदी में प्रदूषित जल के प्रवाह को रोकने के लिए नई योजना का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त गंगा एवं सहायक नदियों में सेप्टेज प्रबंधन एवं निस्तारण, प्रदूषण नियंत्रण कार्यों, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा ड्रेन-नालों की सफाई कार्यों की भी समीक्षा की गई।इस दौरान सहायक नगर आयुक्त नगर निगम ऋषिकेश चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि सड़कों पर घूम रहे निराश्रित पशुओं की धरपकड़ कर उन्हें गौ रक्षा शाला में भेजने की व्यवस्था लगातार की जा रही है।

बैठक में प्रभागीय अरण्यपाल एवं समिति संयोजक नीरज कुमार शर्मा, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता दीक्षांत गुप्ता, पेयजल निगम मसूरी के सहायक अभियंता एम.एस. मनराल, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी एस.एस. चौहान, पेयजल निगम ऋषिकेश के परियोजना प्रबंधक संजीव कुमार वर्मा, जिला गंगा संरक्षण समिति के परियोजना अधिकारी रविकांत पांडेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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